Tuesday, March 3, 2026
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स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर और ज्ञानवापी मामले में दो अप्रैल को अब होगी सुनवाई

वाराणसी (हि.स.)। स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर और ज्ञानवापी मामले में गुरूवार को सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) आशुतोष तिवारी की अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद सुनवाई की अगली तिथि अब दो अप्रैल तय की है। जिला जज की न्यायालय ने भी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से दाखिल निगरानी याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तिथि 12 अप्रैल मुकर्रर की है। 

सिविल जज (सीनियर डिवीजन फास्टट्रैक) आशुतोष तिवारी ने वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से ज्ञानवापी परिसर में पुरातात्त्विक सर्वेक्षण कराने की याचिका पर दोनों पक्षों की आंशिक बहस सुनी। अदालत में सुनवाई के दौरान अंजूमन इंतजामिया मसाजिद और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र दिया कि मुकदमा की पोषणीयता पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में पक्षकारों की बहस पूरी हो चुकी है। उच्च न्यायालय ने निर्णय सुरक्षित कर लिया है। अधिवक्ता ने अपील किया कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाए। फास्ट ट्रैक ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद इसे जारी रख सुनवाई की अगली तिथि दो अप्रैल तय की। वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी की ओर से दाखिल प्रार्थना पत्र पर 22 मार्च को न्यायिक अधिकारी के त्रैमासिक मुआयने में रहने के कारण सुनवाई नही हो पाई थी । मामले की सुनवाई की तिथि 25 मार्च न्यायालय ने तय किया था। 
बताते चले, स्वयंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर की ओर से पंडित सोमनाथ व्यास और अन्य ने ज्ञानवापी में नए मंदिर के निर्माण तथा हिंदुओं को पूजा-पाठ का अधिकार देने के लिए वर्ष 1991 में स्थानीय अदालत में मुकदमा दाखिल किया था। जिसमें पक्षकारों ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद ज्योतिर्लिंग विश्वेश्वर मंदिर का अंश है। मस्जिद की जगह पहले मंदिर स्थापित था और मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने अपने शासनकाल में मंदिर को गिराकर मस्जिद का निर्माण कराया था।  प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर व अन्य के वाद मित्र अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने अदालत में याचिका दाखिल कर ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग की है। वादमित्र के अनुसार जब देश आजाद हुआ था, तब ज्ञानवापी परिसर का धार्मिक स्वरूप मंदिर का था। इसलिए वास्तविकता का पता लगाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से पुरातात्विक सर्वेक्षण कराया जाए।

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