उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी परिसर में चल रहा है स्वदेशी मेला
हाथ की बनी चीजें और घरेलू वस्तुएं बनीं आकर्षण का केंद्र
लखनऊ (हि.स.)। अगर आपको स्वदेशी वस्तुओं की चाहत हैं तो एक बार जरूर आइए स्वदेशी मेले में। मेले में आपको हाथ की बनी और बाजार से सस्ती चीजें मिलेगी। मेले का आयोजन उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी परिसर में किया जा रहा है। मेला 26 दिसम्बर तक चलेगा।
पीजिए तंदूर की बनी चाय
चाय तो बहुत पी होगी लेकिन तंदूर की बनी चाय यहीं पीने को मिलेगी और वह भी कुल्हड़ में। इस चाय में बहुत सारी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां मिली हुई। स्टाल पर शाहजहांपुर से आए सचिन बताते हैं कि इस चाय में जायफल, चक्री, अजवाइन, जड़ील सहित बहुत सारे मसाले और बूटियां पड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि एक बार चाय पीने में शरीर का पूरा दर्द दूर हो जाएगा। यह चाय 30 रुपए के छोटे कुल्हड़ के भाव से बिक रही है।
खल में कुटे हुए मसाले हैं यहां
ऐशबाग, मालवीय नगर से घर के बने मसालों को लेकर भारती, राजकुमारी गुप्ता और ममता आई हैं। इनके पास घर के पिसे अलग-अलग और मिलवां मसाले भी हैं । वह भी बिल्कुल शुद्ध है। स्टाल पर भारती ने बताया कि यह सारे मसाले घर पर ही महिलाएं खल में मूसल से कूटती हैं, जिनमें अशुद्धता बिल्कुल भी नहीं हैं। ये अलग-अलग पैकेटों में बिक्री के लिए उपलब्ध है। उसी हिसाब से इनके दाम भी हैं।
ब्लॉक प्रिंट की चादरें भी हैं यहां
सीतापुर के हस्तशिल्पी अख्तर अली अंसारी ब्लाक प्रिंट चादरें मेले में लाए हैं। इस काम में जेना बानों अंसारी भी हाथ बटाती हैं। वह बताते हैं कि ब्लॉक प्रिंट कॉटन व अन्य कपड़ों पर भी हो जाती है। कपड़े के हिसाब से ही उसके दाम तय होते हैं। अंसारी ने बताया कि हमारा पूरा परिवार ही इस काम से लगा रहता है। सुबह से शाम तक यही काम करते हैं।
जाड़ों में फायदा करता है उत्तराखण्ड का अनाज
उत्तराखण्ड से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं वहां का अनाज, बड़ियां लेकर आई हैं । स्टाल पर अनुसुइया बताती है कि वहां का अनाज इस जाड़े में बहुत फायदा करता है। उनके पास राजमा, मूंगफली, बड की दाल सहित और बहुत से चीजें हैं।
इसके अलावा भी चमड़े का सामान, पापड़ व मूंग की बड़ी, कॉलीन, फर्नीचर सहित अन्य बहुत से चीजों के स्टाल लगे हुए हैं।
शैलेंद्र मिश्रा
