Wednesday, January 14, 2026
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स्कूल छात्रा की मौत मामला : हाईकोर्ट ने एसआईटी की अधूरी रिपोर्ट लेने से किया इंकार

-सरकार ने कहा, छात्रा ने आत्महत्या की

प्रयागराज(हि.स.)। मैनपुरी में छात्रा की स्कूल परिसर में मौत मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा कि अभी तक हत्या के साक्ष्य नहीं मिले हैं। एसआईटी ने हरसंभव पहलू पर विचार किया। छात्रा ने आत्महत्या की है। जिसकी पारिवारिक वजह हो सकती है।

कोर्ट ने एसआईटी द्वारा पेश की गई अधूरी रिपोर्ट को लेने से इंकार कर दिया और कहा कि पूरी रिपोर्ट पेश की जाय। सरकार की तरफ से बताया गया कि 277 संदिग्धों की डीएनए जांच में अपराधी का पता नहीं चल सका है। रिपोर्ट को दुबारा चेक किया जा रहा है। कोर्ट ने पिछले साल 2020 में मृत छात्रा की मां की तरफ से सीबीआई जांच की मांग में दाखिल याचिका की कोर्ट को जानकारी न देने पर नाराजगी जाहिर की और दोनों याचिकाओं को सुनवाई के लिए 2 दिसम्बर को पेश करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में देरी की गई और साक्ष्य नष्ट होने दिया गया। इसमें पुलिस की अक्षमता परिलक्षित होती है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने महेंद्र प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर दिया है।

कोर्ट ने पूछा कि स्कूल परिसर में छात्रा की मौत की सूचना परिजनों को क्यों नहीं दी गई। इस पर राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल चतुर्वेदी ने कहा कि मां को फोन किया गया था, किन्तु उसने नहीं उठाया। छात्रा को फंदे से उतार कर सुबह 6.15 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया, किंतु तब तक छात्रा की मौत हो चुकी थी। 11.10 बजे पुलिस को सूचना दी गई। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को सूचना देने में 5 घंटे क्यों लगे। तो कहा गया कि लोकल पुलिस ने लापरवाही बरती। इस पर कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता चतुर्वेदी से पूछा वह किसकी तरफ से वकील हैं। जवाब में बताया कि पहले एसआईटी की तरफ से थे। अब राज्य सरकार की तरफ से हैं।

कोर्ट ने कहा कि दो साल बीत गए अभी तक नामजद आरोपी गिरफ्तार नहीं किए गए। क्या सरकार ऐसा डेटा दे सकती है कि जिसमें नामजद हत्या का मुकदमा दर्ज हो और आरोपी को बिना गिरफ्तार किए अन्वेषण किया जा रहा हो। इस पर चतुर्वेदी ने कहा कि यदि कोर्ट कहे तो 6 आरोपियो को गिरफ्तार कर लिया जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह पुलिस का काम है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि घटना से पहले मृत छात्रा ने मां से शिकायत की थी। प्रधानाचार्या ने मां से मिलने से इन्कार कर दिया था। बेटी ने मां को पिता के साथ आने को कहा था। मृतका के कपड़े पर सीमेन मिला था। पंचनामा में शरीर पर चोट के निशान थे। लाश भी परिवार को नहीं दी गई। दुबारा पोस्टमार्टम नहीं कराया।

सरकारी वकील ने कहा कि तीन डाक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। जिसका परीक्षण एम्स के डॉक्टरों से कराया गया है। लाश मां को सौंपी गई। याची ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट में पुलिस ने लाश गंगा में बहा दी। अंतिम संस्कार नहीं किया गया। मामले की सुनवाई 2 दिसम्बर को होगी।

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