भारतीय सेना जर्मनी से मंगाएगी 23 मोबाइल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट
– दिल्ली के बेस अस्पताल को अब 1000 बेड में तब्दील करने की तैयारी
सुनीत निगम
नई दिल्ली (हि.स.)। देशभर के सरकारी और निजी अस्पतालों की तरह सैन्य अस्पतालों में भी ऑक्सीजन की कमी हो गई है। दिल्ली कैंट स्थित बेस हॉस्पिटल में ऑक्सीजन बेड ना मिलने की वजह से दो दिन पहले एक पूर्व ब्रिगेडियर की मौत भी हो चुकी है। इसीलिए सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) ने जर्मनी से ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों और कंटेनरों को आयात करने का फैसला किया है। इन्हें उन एएफएमएस अस्पतालों में लगाया जाएगा जो कोविड रोगियों की देखभाल कर रहे हैं।
दिल्ली कैंट स्थित बेस हॉस्पिटल में फिलहाल 258 ऑक्सीजन बेड हैं और सभी भरे हुए हैं। इसी वजह से दो दिन पहले पश्चिम विहार निवासी पूर्व ब्रिगेडियर रशपाल सिंह परमार की मौत हो चुकी है। ब्रिगेडियर परमार को 14 मार्च, 1971 को कोर ऑफ ईएमई में नियुक्त किया गया था। वह सेना की इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स शाखा से रिटायर हुए थे। कोविड के कारण हालत बिगड़ने पर उनका बेटा पहले डीआरडीओ के सरदार पटेल कोविड हॉस्पिटल लेकर गया। वहां ऑक्सीजन बेड ना मिलने के बाद बेटा बेस हॉस्पिटल लेकर गया।वहां भी ऑक्सीजन बेड ना मिलने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाने की उम्मीद में चंडीगढ़ ले जाया जा रहा था लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
दिल्ली में सेना मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रक्षा सेवाओं ने उन क्षेत्रों में संसाधन बढ़ाए हैं जहां कोविड रोगियों की संख्या बढ़ रही है। चिकित्सा संसाधनों को बढ़ाया जा रहा है और सेवानिवृत्त अधिकारियों की देखभाल के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। भूतपूर्व सैनिक शिकायत प्रकोष्ठ, मोहाली के अध्यक्ष और ब्रिगेडियर परमार के वरिष्ठ साथी रहे लेफ्टिनेंट कर्नल एस सोहीने कहा कि इस आपातकालीन स्थिति में सैन्य अस्पतालों को सेना के पूर्व अधिकारियों के लिए काम करना चाहिए। आम नागरिकों के लिए सेना के अस्पताल खोले जा रहे हैं जिस पर हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन कम से कम सेना के पूर्व अधिकारियों को दयनीय हालत में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
जर्मनी से आने वाले ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों के बारे में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि प्रत्येक संयंत्र में प्रति मिनट 40 लीटर और एक घंटे में 2,400 लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करने की क्षमता है। इस तरह एक संयंत्र 20-25 मरीजों को 24 घंटे ऑक्सीजन की जरूरत पूरी कर सकता है।इन्हें आसानी से कहीं भी लाया और ले जाया सकता है। एक सप्ताह के भीतर ऑक्सीजन उत्पन्न करने वाले इन संयंत्रों के भारत आने की उम्मीद है। जर्मनी से लाए जाने वाले इन सभी 23 मोबाइल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट्स को सेना के अस्पताल में लगाया जाएगा। वहीं से ऑक्सीजन की सप्लाई की जाएगी, ताकि सेना के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी ना हो। इसके अलावा राजधानी दिल्ली स्थित बेस अस्पताल को अब 1000 बेड में तब्दील करने की तैयारी है।
नई दिल्ली स्थित जर्मनी दूतावास ने कहा है कि जर्मन की निजी कंपनी लिंडे और टाटा के सहयोग से मोबाइल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट्स जल्द ही एयर लिफ्ट करके भारत लाये जायेंगे।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में रक्षा मंत्रालय ने कोविड की दूसरी लहर को देखते हुए सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा में शॉर्ट सर्विस कमीशन के 238 डॉक्टरों की सेवा में विस्तार करने का निर्णय लिया है। इससे इस महामारी के दौर में सैन्य चिकित्सा सेवा की ताकत में वृद्धि होगी।
