Tuesday, March 31, 2026
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सुहाग की लम्बी उम्र के लिए महिलाएं शुक्रवार को रखेंगी वट सावित्री व्रत

लखनऊ (हि.स.)। अखण्ड सौभाग्य की मनोकामना के साथ सुहागिन महिलाएं शुक्रवार (19 मई) को वट सावित्री व्रत रखेगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को रखा जाता है। आम भाषा में लोग इसे बरगदाई भी बोलते हैं। इस व्रत में पति की लम्बी उम्र के लिए महिलाएं बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं।

पंडित अनिल कुमार पाण्डेय ने बताया कि इस व्रत के पीछे भी एक पौराणिक कथा है। उन्होंने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पति सत्यवान की मृत्यु के बाद देवी सावित्री ने एक वट वृक्ष के तपस्या करके यमराज को प्रसन्न करके पति को नया जीवन दिया था। तभी से सुहागिन महिलाएं यह व्रत का अनुष्ठान करती है।

सनातन परम्परा में जिस वृक्ष, पशु, पक्षी से मनुष्य के जीवन निर्वाह में योगदान मिलता है, उसकी पूजा कर उसे पोषित और उसके प्रति आदर-सम्मान बनाए रखने के लिए पूजा का विधान किया गया। इसी प्रकार अक्षय वट का पौराणिक महत्व के साथ-साथ मानव जीवन में भी बड़ा योगदान है।

उन्होंने बताया कि धर्मग्रंथों में ऐसा माना गया है कि वट वृक्ष को देव वृक्ष कहा गया हैं। मान्यता है कि इस वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु और अग्रभाग में भगवान शिव विरामान होते है। देवी सावित्री भी इस वृक्ष में प्रतिष्ठित रहती हैं। कहा गया है कि प्रलय काल में इसी वृक्ष के पत्तों पर भगवान श्रीकृष्ण ने बालरूप में मार्कण्डेय ऋषि को प्रथम दर्शन दिए थे।

प्रयागराज में वेणीमाधव के पास अक्षयवट प्रतिष्ठित है। गोस्वामी तुलसी दास ने इस वृक्ष को ‘श्रीरामचरित मानस’ तीर्थराज का छत्र बताया है। इस प्रकार तीर्थों में पंचवटी का विशेष महत्व है। पांच वटों से युक्त इस स्थान को पंचवटी कहा गया है।

शैलेंद्र/दीपक/मोहित

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