Saturday, April 11, 2026
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सुविधाओं की कमी से कुशीनगर नही उतर रहे वियतनामी विमान

-300 करोड़ खर्च कर बने एयरपोर्ट पर उठने लगे सवाल

कुशीनगर(हि. स.)। सुविधाओं के अभाव में वियतनामी पर्यटकों के विमान कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर न उतरकर वाराणसी व बोधगया एयरपोर्ट पर लैंड कर रहे हैं। इस स्थिति में 300 करोड़ से अधिक की रकम खर्च कर बनाए गए अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण के औचित्य पर सवाल उठना शुरू हो गया है।

अभी हाल ही में सात अक्टूबर को 360 वियतनामी सैलानियों का दल कुशीनगर आया था। दल ने वाराणसी एयरपोर्ट पर लैंडिंग की और टेक आफ बोधगया एयरपोर्ट से किया। इसके पूर्व 8 अगस्त को 75 , 2 सितम्बर को 109 और 18 सितम्बर को 143 वियतनामी सैलानियों का दल कुशीनगर आया । सभी दल चार्टर विमान से भारत आए पर किसी भी दल के विमान की लैंडिंग कुशीनगर एयरपोर्ट पर नहीं हुई । गत 27 मार्च को विशेष फाल्कन विमान से कुशीनगर आए वियतनामी बौद्ध भिक्षुओं व पर्यटन उद्यमियों के दल के आगमन से यह संकेत मिला था कि पर्यटन सीजन में वियतनाम के जहाज कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उतरेंगे। पर एयरपोर्ट वियतनामी दल की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया।

संसाधनों की कमी बन रही बाधा

कुशीनगर एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय विमानों के न उतरने में संसाधनों की कमी बड़ी बाधा बन रही है। दरअसल हर मौसम में ऑटो मोड लैंडिंग के लिए आईएलएस न होना बड़ी वजह बन रहा है। दूसरा कारण एयरपोर्ट पर ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी का न होना है। विमानों की लैंडिंग के बाद यात्रियों के उतरने के लिए सीढ़ी लगाने से लेकर उनके लगेज को उतारने व टर्मिनल बिल्डिंग तक ढुलाई का सारा कार्य एजेंसी के जिम्मे होता है। तीसरा बड़ा कारण यहां लक्जरी बस बेड़ें की सुविधा से युक्त टूर ट्रैवेल एजेंसियों का नहीं होना है, जिससे यात्री बौद्ध सर्किट में परिवहन कर सके। बाहर से बसों को मंगाने में पर्यटकों पर भार बढ़ता है जिससे पर्यटक यहां लैंड नहीं करना चाहते हैं।

चल रही प्रक्रिया

प्रभारी एयरपोर्ट निदेशक पी प्रदीप ने कहा कि पर्यटक कहां उतरना पसंद करते हैं यह उनका विषय है। यहां सभी प्रकार के विमान यहां उतरने की सुविधा है। लैंडिंग के लिए कोई अनुमति मांगता है तो उसे दी जाती है। फिलहाल अभी तक किसी विदेशी एजेंसी ने ऐसी कोई अनुमति नही मांगी है। आईएलएस का कार्य चल रहा है। वैकल्पिक ग्राउंड हैंडलिंग सुविधा भी है। स्थाई एजेंसी के लिए प्रक्रिया चल रही है।

गोपाल

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