– हैट्रिक लगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे इरफान सोलंकी
कानपुर (हि.स.)। राम मंदिर आंदोलन की लहर में पहली बार भाजपा के खाते में गई सीसामऊ विधान सभा सीट पर पिछले 21 सालों से कमल नहीं खिला। यही नहीं पिछले विधान सभा चुनाव में मोदी लहर में भी यह सीट सपा के खाते में चली गई। लेकिन इस बार अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से दो मुस्लिम उम्मीदवारों के सामने आने से भाजपा के खेमे में जीत की उम्मीद जग गई है। ऐसे में अब देखना होगा कि भाजपा उम्मीदवार सलिल विश्नोई 21 साल के सूखे को खत्म कर कमल को खिला पाएंगे?
सीसामऊ विधान सभा सीट 1974 में अस्तित्व में आई और पहली बार कांग्रेस के शिवलाल विजयी रहे। इसके बाद से एक बार को छोड़कर राम मंदिर आंदोलन यानी 1991 के पहले तक कांग्रेस का ही कब्जा रहा। राम मंदिर आंदोलन की लहर यहां पर ऐसी चली कि कांग्रेस चारो खाने चित हो गई। यही नहीं लगातार तीन बार भाजपा के राकेश सोनकर चुनाव जीतते चले गये। इसके बाद लगातार दो बार फिर यह सीट कांग्रेस के खाते में चली गई और 2012 में परिसीमन के चलते इस सीट के क्षेत्रों में कुछ बदलाव हो गया। नये परिसीमन में इस सीट पर कई मुस्लिम इलाके शामिल हो गये और सपा के इरफान सोलंकी लगातार दो बार विधायक बने। यही नहीं तीसरी बार इसी सीट से विधायक बनने के लिए पार्टी ने एक बार फिर इरफान को उम्मीदवार बना दिया है। हालांकि तीन बार इरफान विधायक हो चुके हैं लेकिन एक बार वह आर्यनगर से विधायक बने थे।
देखने को मिलेगी टक्कर
इस सीट पर हैट्रिक लगाने को लेकर इरफान सोलंकी जबरदस्त मेहनत कर रहे हैं। वहीं, भाजपा के सलिल विश्नोई भी चौथी बार (तीन बार आर्य नगर से विधायक थे) विधान सभा पहुंचने के लिए जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में जुटे हैं। इस बार सबसे दिलचस्प यह है कि कांग्रेस ने सुहैल अहमद को टिकट दिया है जो सपा पार्षद दल के नेता थे। ऐसे में भाजपाई यह मानकर चल रहे हैं कि मुस्लिम मतदाताओं का वोट दोनों में बंटेगा और 21 साल बाद एक बार फिर कमल खिलेगा। हालांकि देखा जाए तो सलिल विश्नोई और इरफान में पूरी संभावना है कि जबरदस्त टक्कर देखने को मिलेगी। दोनों अनुभवी और जमीनी राजनेता हैं और दोनों चौथी बार विधान सभा पहुंचने की उम्मीद संजोए हुए हैं।
मोदी लहर में पांच हजार वोटों से जीते थे इरफान
पिछले विधान सभा चुनाव में मोदी लहर जबरदस्त चल रही थी। इसके बावजूद सपा के इरफान सोलंकी अंतिम दौर में 5826 मतों से भाजपा के प्रत्याशी सुरेश अवस्थी को हराकर जीतने में सफल रहे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नंद लाल कोरी तीसरे स्थान पर रहे थे।
इस सीट पर इनको मिली जीत
सीसामऊ विधानसभा सीट के चुनावी अतीत की बात करें तो ये सीट साल 1974 के विधानसभा चुनाव से अस्तित्व में है। ये सीट आरक्षित हुआ करती थी। इस विधानसभा सीट से 1974 में कांग्रेस के शिव लाल, 1977 में जनता पार्टी के मोती राम, 1980 और 1985 में कांग्रेस के कमला दरियाबादी, 1989 में जनता दल के शिव कुमार बेरिया, 1991, 1993 और 1996 में लगातार तीन दफे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राकेश सोनकर विधायक निर्वाचित हुए। 2002 और 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के संजीव दरियाबादी विधानसभा पहुंचे। 2008 के परिसीमन में कानपुर नगर जिले की ये सीट सामान्य हो गई। इस सीट के सामान्य होने के बाद साल 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर हाजी इरफान सोलंकी विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद 2017 में भी इरफान विधायक बनने में सफल रहे।
अजय/मोहित
