-तीन दिवसीय प्रशिक्षण में संगध पौधों के बारे में विस्तार से की गयी चर्चा
लखनऊ (हि.स.)। सी.एस.आई.आर.-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत मंगलवार को हो गयी। इसमें 14 राज्यों के 31 जनपदों से 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया। अट्ठारह नवम्बर तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किया।
निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि औषधीय एवं सगंध पौधों की विश्व स्तरीय मांग को देखते हुए इनकी खेती करना आवश्यक हो गया है। घटते जल स्तर तथा जानवरों से होने वाले नुकसान की समस्या के कारण भी औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती की मांग बढ़ी है। इस संस्थान के वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों द्वारा किसानों के लिये औषधीय एवं सगंध पौधों की उन्नत प्रजातियाँ विकसित की गयी हैं, जिनसे किसानों को अधिक से अधिक पैदावार व लाभ मिलेगा।
कहा कि अगले दो दिन चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीमैप के वैज्ञानिक आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती पर विस्तार से चर्चा करेंगे तथा साथ ही प्रसंस्करण एवं भंडारण की तकनीकियों पर भी चर्चा करेंगे। इससे किसानों के उत्पादन को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता को बनाया जा सके और उसका अधिक तथा उचित मूल्य किसानों को मिल सकें। इन औषधीय एवं सगंध फसलों में मुख्यतः नीबूघास, पामारोजा, जिरेनियम, तुलसी इत्यादि हैं। वर्तमान में इनके तेलों की मांग विश्व बाज़ार में अधिक है।
आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. संजय कुमार, नोडल प्रशिक्षण कार्यक्रम व प्रधान वैज्ञानिक ने संस्थान की गतिविधियों तथा प्रदत्त सेवाओं के बारे में प्रतिभागियों को जानकारी दी तथा आज के तकनीकी सत्र में डॉ. संजय कुमार ने नीबू घास व रोशा घास के उत्पादन की उन्नत कृषि तकनीकी प्रतिभागियों से साझा की डॉ. सौदान सिंह ने मिंट की उत्पादन तकनीकी पर प्रतिभागियों से विस्तार से चर्चा की । डॉ. राजेश वर्मा ने जिरेनियम की वैज्ञानिक खेती के बारें में प्रतिभागियों को जानकारी दी। इस अवसर डॉ. संजय कुमार, डॉ. राम सुरेश शर्मा, डॉ. सौदान सिंह, डॉ. सुदीप टंडन, डॉ. राजेश वर्मा, दीपक कुमार वर्मा इत्यादि उपस्थित रहे।
