Friday, February 13, 2026
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सीमैप ने साईं इंस्टीट्यूट को दी तकनीक, अब बनारस के मंदिरों पर चढ़े फूल से महकेगा घर-आंगन

– सीएसआईआर-सीमैप के निदेशक व साईं इंस्टीट्यूट के प्रमुख ने एमओयू पर किये हस्ताक्षर

लखनऊ (हि.स.)। सीएसआईआर-केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर- सीमैप), लखनऊ ने फूलों से अगरबत्ती बनाने की तकनीकी को साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रुरल डेव्लपमेंट वाराणसी को हस्तांतरित किया। प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अनुबंध पर सीएसआईआर-सीमैप के प्रशासनिक नियंत्रक, भास्कर ज्योति देउरी तथा साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रुरल डेव्लपमेंट, वाराणसी के प्रमुख डॉ. अजय कुमार सिंह ने हस्ताक्षर किए। संस्था अगले दो महीनो में वाराणसी के मंदिरों पर चढ़े फूलों से अगरबती तथा कोन का निर्माण शुरू कर अपने ब्रांड का उत्पाद बाजार में उतारेगी।

सीएसआईआर.सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने बताया कि इस तकनीक से उत्तर प्रदेश के कई शहरों जैसे गोरखपुर, अयोध्या, बनारस, लखनऊ एवं लखीमपुर में यह कार्य महिलाओं के साथ-साथ जिला कारागार में भी इसके प्रशिक्षण आयोजित कर महिलाओं को रोजगार प्रदान किया जा रहा है। इन उत्पादों को सीएसआईआर-सीमैप द्वारा वैज्ञानिक रूप से परीक्षण किया गया है। ये उत्पाद ज्यादातर मंदिर में चढ़े फूलों से तथा सुगंधित तेलों से बने होते हैं और इस संस्थान द्वारा उनके उत्पादन से देश में फूलों की खेती करने वाले किसानों को भी आर्थिक लाभ होगा।

इस तकनीकी पर 16 दिसम्बर, 2020 को बनारस में साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रुरल डेव्लपमेंट, वाराणसी में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसके परिणाम स्वरूप आज इस अनुबंध पर हस्ताक्षर हुआ। इस तकनीकि के हस्तांतरण से प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को भी गति मिलेगी व मंदिरों के चढ़ावे के फूलों से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेगी।

इस अवसर पर भास्कर देउरी, प्रशासनिक नियंत्रक, डॉ. संजय कुमार, डॉ. राम सुरेश शर्मा, डाक्टर मनोज सेमवाल आदि भी मौजूद थे।

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