संकट मोचन दरबार में सुबह से ही नवाह्न पारायण पाठ
जनकपुर मंदिर में भगवान राम को दिया जायेगा गार्ड आफ आनर
वाराणसी(हि.स.)। अगहन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर बुधवार को काशीपुराधिपति की नगरी में उनके आराध्य भगवान राम के विवाहोत्सव (सीताराम विवाह) को लेकर साधु—संतों के साथ धर्मप्राण नागरिकों में भी उत्साह है। उल्लासपूर्ण माहौल में आस्था के साथ मठों और मंदिरों में शाम को विवाह की पूरी तैयारी है।
सीताराम विवाह पंचमी पर ही श्री संकट मोचन मंदिर में सुबह से ही नवाह्न पारायण पाठ शुरू हो गया। प्रातः काल अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास व श्री संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विशंभर नाथ मिश्र ने श्री रामचरितमानस पोथी, आचार्य राघवेंद्र पांडेय एवं 108 ब्राह्मणों का वेद मंत्रों के बीच पूजन अर्चन किया। इस अवसर पर प्रो. मिश्र ने कहा कि सीताराम विवाहोत्सव पर मंदिर में 108 ब्राह्मणों द्वारा श्री रामचरितमानस का पाठ एवं मानस सम्मेलन का आयोजन होता है।
कलयुग में मानस मानव के कष्टों को दूर करने में सबसे बड़ा साधन है। उन्होंने कहा कि जिस घर में मानस का पाठ और इसे अमल में लाने का संकल्प होता है। उस घर में रामराज अवश्य आता है । कलयुग का आधार ही है मानस। जजमान प्रेमचंद मेहरा ने महंत प्रो. मिश्र का माल्यार्पण कर उनका पूजन अर्चन किया।
रामनगर स्थित जनकपुर मंदिर में भगवान के विवाह की तैयारी
श्री सीताराम विवाह पंचमी पर रामनगर स्थित जनकपुर मंदिर में सुबह से ही सीताराम विवाह की तैयारियां चलती रही। मंदिर में शाम को चारों भाइयों के सिर मौर (सेहरा) बांध कर एक ही मंडप में विवाह संपन्न किया जाएगा। इस अवसर पर 36वीं वाहिनी पीएसी की ओर से राजा श्रीरामचंद्र को गार्ड आफ आनर भी दिया जायेगा। इसके बाद प्रभु के विग्रह के सामने लड्डू व खाझा का भोग लगाया जायेगा।
प्रभु के कोहबर की झांकी देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। पूर्व काशीराज का परिवार भी इसमें पूरी श्रद्धा के साथ भागीदारी करता है। जनकपुर मंदिर में सीता-राम, मांडवी-भरत, उर्मिला-लक्ष्मण व श्रुतकीर्ति-शत्रुघ्न अद्भुत प्रतिमा देख हर कोई अभिभूत हो जाता है। अस्सी स्थित रामजानकी मठ में श्रीराम विवाह पंचमी पर अपरान्ह बाद बारात की शोभायात्रा निकलेगी।
श्रीधर
