Monday, March 16, 2026
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सितम्बर में कोरोना का फैलाव बढ़ा पर गंभीरता हुई कम



गाजियाबाद (हि.स.)। सितम्बर  में जनपद में कोरोना का फैलाव जरूर बढ़ा है लेकिन गंभीरता काफी कम हुई है। जनपद में मृत्यु दर जहां घटकर दशमलव 55 (.55) प्रतिशत रह गई है वहीं सरकारी और निजी अस्पतालों में सितम्बर  के जाते-जाते आईसीयू और एल-3 स्तर के कोविड बेड खाली होने लगे। स्थिति यह है कि सरकारी स्तर पर संचालित एल-3 कोविड अस्पताल में 400 बेड हैं और 28 सितंबर को इनमें से केवल 53 बेड ही भरे हुए थे, जबकि 347 बेड खाली पड़े हैं। मुख्य  चिकित्सा अधिकारी डा. एनके गुप्ता ने बताया कि इसी प्रकार एल-2 केटेगरी के 290 और एल-1 केटेगरी के कुल 614 बेड खाली हैं। 
सरकारी अस्पतालों में ही नहीं निजी कोविड अस्पतालों में भी यही हाल है। जनपद में कुल दस निजी अस्पतालों में कोविड अस्पताल बनाए गए हैं। इनमें कुल 5316 सामान्य कोविड बेड हैं। इनमें केवल 1001 बेड  पर मरीज भर्ती हैं जबकि 4315 बेड खाली हैं। आईसीयू और वेंटीलेटर वाले कुल 164 बेड ‌इन निजी कोविड अस्पतालों में उपलब्ध हैं, केवल आठ बेड भरे हुए हैं बाकी 156 बेड खाली हैं। इसी प्रकार निजी कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन की सुविधा वाले कुल 1015 बेड हैं, फिलहाल केवल 33 बेड उपयोग किए जा रहे हैं जबकि 982 बेड खाली हैं।    संयुक्त जिला अस्पताल में संचालित किए जा रहे एल-2 कोविड अस्पताल के फिजीशियन डा. आरसी गुप्ता का कहना है कि शुरू में कोविड-19 का असर ज्यादा गंभीर था, इधर इसकी तीव्रता में कमी आई है। जहां उपचार की बात है तो रेमिडीशिविर जैसी दवाएं अब हमारे पास उपलब्ध हैं। पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित अति संवेदनशील उपचाराधीनों को रेमिडीशिविर दी जाती है, जिससे कोविड-19 का असर काफी हद तक कम हो जाता है। डा. गुप्ता तो यहां तक कहते हैं कि बेशक अब  भी हम कोविड अस्पताल में लक्षण आधारित उपचार देते हैं लेकिन इतना तो साफ है कि अब मरीज उतने गंभीर नहीं हो रहे हैं। समय रहते उपचार शुरू हो जाए तो जान को खतरा काफी कम हुआ है।
3819 उपचाराधीनों ने लिया होम आईसोलेशनजिले में अब तक कुल 3819 उपचाराधीनों  ने होम आईसोलेशन की सुविधा ली है। शासन द्वारा निर्धारित नियमों के अंतर्गत केवल लक्षण विहीन उपचाराधीनों को ही होम आईसोलेशन की सुविधा दी जाती है। सीएमओ ने बताया कि जनपद में 27 सितंबर तक 691 उपचाराधीन अपना होम आईसोलेशन पूरा कर चुके थे। होम आईसोलेशन में रह रहे उपचाराधीनों की देखभाल करने के लिए जनपद में 12 रैपिड  रेस्पांस टीम (आरआरटी) काम कर रही हैं। इसके अलावा कमांड कंट्रोल रूम से नियमित निगरानी की जाती है।

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