Tuesday, March 3, 2026
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साधनाश्रम में अयोध्या आने वाले रामभक्तों को साधना के लिए उपयुक्त स्थान मिलेगा : अरविंद शर्मा

-वेदमंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच गुरुवार को हुआ साधनाश्रम लोकापर्ण 

अयोध्याा (हि. स.)। साध्य, साधना व साधक इन तीनों की संगति को परिभाषित करते साधनाश्रम का पूर्व आईएएस व विधान परिषद सदस्य अरविंद कुमार शर्मा, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिवविहिप उपाध्यक्ष चम्पत राय, न्यायमूर्ति डीपी सिंह, जिलाधिकारी अनुज कुमार झा, डीआईजी/एसएसपी दीपक कुमार ने वेदमंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच गुरुवार को लोकापर्ण किया। कनक भवन रोड स्थित रामकोट श्रीराम आश्रम में रामभक्तों व अयोध्या आने वाले साधकों के लिए यह साधनाश्रम उपलब्ध रहेगा। 
इस अवसर पर अरविंद शर्मा ने कहा कि अयोध्या आना सौभाग्य का विषय है। कुछ हफ्ते पहले अयोध्या आया था, तो हनुमानगढ़ी का दर्शन करके लौट गया था। इस बार यहां के डिप्टी डायरेक्टर सूचना डॉ. मुरलीधर सिंह के बुलाने पर आया हूं। इलाहाबाद में पढ़ाई के दौरान हम एक कमरे में रहते थे। उन्होंने कहा कि साधनाश्रम में अयोध्या आने वाले रामभक्तों को साधना हेतु उपयुक्त स्थान मिलेगा। अयोध्या की धरती का वर्णन करना अपने आप में कठिन है। यहां आकर संतों का दर्शन मिलता है। हमारे धर्म में संतों व गुरु को ईश्वर से बड़ा स्थान दिया गया है। क्योकिं ईश्वर के बारे में जानकारी हमें संत ही देते हैं। 
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे डीपी सिंह ने कहा कि भगवान राम ने जो संतों एवं ब्राहमणों के सम्मान की परिपाटी चलाई थी। उसी परिपाटी को हम लोग आगे बढ़ाते हैं तथा हम लोग सूर्यवंशी हैं। इस आश्रम के विकास में जो भी मद्द होगा हम एवं मेरा परिवार करेगा। उनके परिवार के उनके अनुज श्री राजेश कुमार सिंह, श्री राजेन्द्र सिंह ने भी इस पर सहमति व्यक्त की। 
जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने कहा कि जो भक्त अयोध्या दर्शन व पूजन के लिए आते हैं उनको यहां एक अच्छा स्थान मिल जायेगा। यहां रहकर अनुष्ठान व पूजन पद्धति की शिक्षा ग्रहण करने वालों को रहने के लिए निःशुल्क स्थान भी उपलब्ध होगा। 
उपनिदेशक सूचना डॉ. मुरलीधर सिंह ने कहा कि आज के एक वर्ष पूर्व श्री रामलला का विग्रह नये मंदिर में स्थापित हुआ था। तथा आज उसी वर्षगांढ के साथ साथ आज रंगभरी एकादशी है। इस अवसर पर इस साधनाश्रम को लोकापर्ण के लिए आये हुए महानुभाव कोई न्याय क्षेत्र का, कोई धर्म क्षेत्र का, कोई प्रशासनिक क्षेत्र का, कोई मीडिया क्षेत्र का स्तम्भ है। हम सनातन धर्मावलम्बियों को, सनातन संस्कृति एवं आश्रम के विकास में मद्द करनी चाहिए। क्योंकि साधू महात्मा ने जब किसी को आर्शीवाद देते है तो फलित होता है। ऐसी परम्परा का इस भक्ति के महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि भारद्वाज, महर्षि याज्ञवल्क, महर्षि जाबालि ने परम्परा हो आगे बढ़ाया है। हम गृहस्थों, अधिकारियों को आश्रमों के विकास, साधू संतो की चिंताए करनी चाहिए। इस राष्ट्र का विकास होगा एवं हमारे प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री जी का यही संकल्प है। इस दौरान 21 बटुक ब्राहमणों के द्वारा वैदिक सनातन संस्कृति के अनुसार स्वास्तिक वाचन किया गया। 

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