गोरखपुर (हि.स.)। हिमालय की तलहटी में सवा चार सौ किलोमीटर क्षेत्र में फैले सोहगीबरवा वन्य जीव अभयारण्य में पर्यटकों की आवक बढ़ाने की तैयारी पर्यटन विभाग ने एक बार फिर शुरू की है। ईको टूरिज्म के जरिये देशी-विदेशी पर्यटकों को लुभाने के लिए पर्यटन विभाग ने वन विभाग के सहयोग से साढ़े आठ करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है।
प्रस्ताव सीएनडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) से तैयार कराया गया है। अब इस प्रस्ताव को धरातल पर उतारने के लिए विभाग शासन की स्वीकृति का इंतजार कर रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक प्रस्तावित धनराशि से अभयारण्य में पर्यटकों के ठहराव के लिए उन विश्रामगृहों का जीर्णोद्धार होगा। पुराने और जर्जर भवन आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनेंगे। सोहगीबरवा के अलग-अलग रेंज में सुरक्षित स्पाट विकसित होंगे, जहां से पर्यटकों को जानवरों के साथ सुंदर और मनमोहक प्राकृतिक दृश्य दिखेगा। स्पाट पर पर्यटकों के अस्थायी ठहराव का इंतजाम भी रहेगा।
क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविन्द्र कुमार मिश्र की मानें तो सोहगीबरवा अभयारण्य में पर्यटकों की आवक बढ़ाने के लिए पर्यटन विभाग प्रतिबद्ध है। इको टूरिज्म के शौकीन पर्यटकों को अगर यहां सुविधा मिलेगी तो वह बड़ी संख्या में आएंगे। इसको ध्यान में रखकर ही एक बार फिर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव मंजूर होते ही इस दिशा में आगे की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।
–प्रस्ताव में यह भी है शामिल
प्रस्ताव में जंगली जानवरों से पर्यटकों की सुरक्षा का भी इंतजाम है। इसके चिन्हित स्थानों पर कटीले तार लगाए जाएंगे। सोलर लाइट लगाई जाएंगी। पर्यटकों को घूमने के दौरान उनके खानपान का भी ख्याल रखा गया है। वे यहां बनने वाले कैंटीन में अपनी क्षुधा शांत कर सकेंगे।
सोहगीबरवा, जैव विविधता का उदाहरण है। यहां दुर्लभ प्रजाति के जीव-जंतु और प्राकृतिक वनस्पतियां मौजूद हैं। इस वजह से वर्ष 1984 में इसे अभ्यारण्य का दर्जा मिला था। यहां से भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी और महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर दोनों ही नजदीक हैं। इसलिए भी यहां पर्यटकों के आने-जाने का अनवरत सिलसिला बना रहता है। पड़ोसी देश नेपाल का रास्ता भी इसके बगल से होकर गुजरता है।
आमोद
