लखनऊ(हि.स.)। संस्थागत प्रसव को सरकार भी प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए ज़रूरी है कि गर्भवती को समय से स्वास्थ्य केंद्र लाया जाये और प्रसव स्वास्थ्य केंद्र पर ही हो। इसके लिए स्टाफ़ को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। अवंतीबाई अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान ने बताया कि यदि किसी बच्चे के अंदर गंदा पानी चला गया है तो स्टाफ़ को प्रशिक्षित किया गया है कि वह म्यूकस एक्सट्रेक्टर के द्वारा गंदा पानी बाहर निकाल लें, व अम्बु बैग से सांस दिलायें, जिससे नवजात की जान बच सके। परिवार को भी यह समझना है कि वह डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही प्रसव की तैयारी करें।
डॉ. सलमान बताते हैं कि एस्फिक्सिया की वजह से मस्तिष्क को हमेशा के लिए क्षति हो सकती है और इसकी वजह से जीवन पर्यन्त अपंगता भी हो सकती है। उनका कहना है कि अमूमन प्रति 100 प्रसव में 10 बच्चों को बर्थ एस्फिक्सिया की शिकायत होती है।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. सलमान ने हिन्दुस्थान समाचार को बताया कि िबर्थ एस्फिक्सिया या जन्म श्वास रोधक एक ऐसी दशा है, जिसमें नवजात पैदा होने के बाद न तो रोता है और न ही सांस लेता है। बच्चे के मस्तिष्क में आक्सीजन की कमी के कारण ऐसा होता है। आक्सीजन की कमी होना मुख्यतः बच्चे के मुंह में गंदा पानी चले जाने, कम वजन का पैदा होने, समय से पूर्व पैदा होने या जन्मजात दोष की वजह से हो सकती है। ऐसे में नवजात को तुरंत उचित देखभाल की जरूरत होती है, नहीं तो स्थिति गंभीर बन सकती है।
बृजनन्दन
