– कहा, हम कानून बनाने वाले नहीं, ऐसे मामलों में फैसला लेना संसद का काम
नई दिल्ली (हि.स.)। दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकसभा, विधानसभा और नगर निगम चुनाव एक साथ कराने को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि हम कानून बनाने वाले नहीं हैं। ऐसे मामलों में फैसला लेना संसद का काम है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी कि वो सरकार और निर्वाचन आयोग को इस बारे में ज्ञापन दे सकते हैं।
वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर करके कहा था कि लोकसभा, विधानसभा, नगर निगम और पंचायतों के चुनाव एक साथ कराने के कई फायदे हैं। सभी चुनाव एक साथ कराने से समय व धन की बचत होने के साथ-साथ जरूरी मैनपावर भी बचता है। याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग इस संभावना का पता लगाए कि क्या सभी चुनाव शनिवार, रविवार या दूसरी छुट्टियों के दौरान हो सकते हैं। इससे स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और दूसरे सेक्टर का बहुमूल्य समय बचेगा।
याचिका में लॉ कमीशन की 170वीं रिपोर्ट का जिक्र किया गया था, जिसमें लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की गई है। याचिका में कहा गया है कि आदर्श आचार संहिता लागू होने से केंद्र और राज्यों की कई योजनाएं और लोक कल्याण से जुड़े प्रोजेक्ट लटक जाते हैं। याचिका में मांग की गई थी कि जिन राज्यों के चुनाव 2023 में होने हैं, उनके चुनाव 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ ही कराए जाएं।
संजय/सुनीत
