कुप्रथा को कुचलकर हिन्दू संस्कृति के प्रति अभिमान संजोएं, ग्रहों की स्थिति में भी परिवर्तन आता है
वाराणसी (हि.स.)। आंग्ल नववर्ष (ग्रेगेरियन नवीन वर्ष) एक जनवरी को मनाने के लिए तैयार युवाओं को सनातन संस्था ने बड़ा संदेश दिया है। सनातन संस्था ने कहा कि युवा नववर्ष एक जनवरी के बजाय सनातनी नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाये।
संस्था के गुरुराज प्रभु ने कहा कि समय आ गया है युवा पीढ़ी स्वतंत्रता के पश्चात भी अंग्रेजों की मानसिक दास्यता में जकडे रहने के बजाय चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्षारंभदिन होने का इंतजार करेे। उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्षारंभदिन होने पर प्राकृतिक परिवर्तन होता है। इस समय वसंत ऋतु में वृक्ष पल्लवित हो जाते हैं । उत्साहवर्धक और आल्हाददायक वातावरण होता है। ग्रहों की स्थिति में भी परिवर्तन आता है । ऐसा लगता है कि मानो प्रकृति भी नववर्ष का स्वागत कर रही है। इस दिन प्रभु श्रीराम ने बाली का वध किया था । इसी दिन से शालिवाहन शक आरंभ हुआ।
इसी दिन ब्रह्मदेव द्वारा सृष्टि का निर्माण, अर्थात सत्ययुग का आरंभ हुआ । यही वर्षारंभ है । निर्मिति से संबंधित प्रजापति तरंगें इस दिन पृथ्वी पर सर्वाधिक मात्रा में आती हैं। गुडी पूजन से इन तरंगों का पूजक को वर्ष भर लाभ होता है । वर्षप्रतिपदा साढे तीन मुहूर्तों में से एक है, इसलिए इस दिन कोई भी शुभकार्य कर सकते हैं । इस दिन कोई भी घटिका (समय) शुभमुहूर्त ही होता है।
इस तरह वर्ष प्रतिपदा, एक तेजोमयी दिन है। उन्होंने आंग्ल नववर्ष मनाने वाले युवाओं से कहा कि 31 दिसंबर की रात में मद्यपान और मांसाहार कर केवल मनोरंजन में समय बीताना अनुचित है। हिन्दू धर्म सर्वश्रेष्ठ धर्म है, परंतु दुर्भाग्य है कि युवा हिन्दू ही इसे समझ नहीं पाते । पाश्चात्यों के योग्य और अधर्मी कृत्यों का अंधानुकरण करने में ही अपने आप को धन्य समझते हैं। ऐसे युवा ३१ दिसंबर की रात में नववर्ष का स्वागत और 01 जनवरी को नववर्षारंभदिन मनाने लगे हैं।
इस दिन रात में मांसाहार करना, मद्यपान कर चलचित्र (फिल्मी) गीतोंपर नाचना, पार्टियां करना, वेग से वाहन चलाना, युवतियों से छेडछाड करना आदि अनेक कुप्रथाओं में वृद्धि होती दिखाई दे रही है। ये युवा पीढी विकृत और व्यसनाधीन हो रही है। राष्ट्र की युवा पीढी धर्म का कार्य करना छोडकर रेन डांस, पार्टियां और पब की दिशा में झुक जाती है। जबकि हिन्दू संस्कृति से जीवन संयमी होता है। गुरूराज प्रभु ने युवाओं से अपील किया कि सभी सगे-संबंधी, परिचित और मित्रों को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर लघु संदेश भेजें–१ जनवरी को नहीं; अपितु वर्षप्रतिपदा पर शुभकामनाएं देकर भारतीय संस्कृतिनुसार नववर्ष मनाएं।
