सता रहा दुर्घटना का भयहर साल भेजा जाता है भवन मरम्मत का प्रस्ताव, बजट के अभाव में नहीं हो पाता है काम

पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में जर्जर व सीलनयुक्त अधिकारी का कक्ष
सचित्र06बीएलपी12: प्राथमिक विद्यालय सेखुआ परमेश्वरी का जर्जर विद्यालय भवन (फाइल फोटो
नहीं हो पा रहा जर्जर स्कूल व सरकारी भवनों का मरम्मत, जान हथेली पर रखकर चिकित्सक व शिक्षक करते हैं काम
जिले में जर्जर सरकारी भवन बन सकते हैं हादसे का सबब
अनदेखी
कार्यालयों में बैठक काम करने से कतराते हैं सरकारी कर्मी, आवास में सता रहा दुर्घटना का भय
हर साल भेजा जाता है भवन मरम्मत का प्रस्ताव, बजट के अभाव में नहीं हो पाता है काम
रोहित कुमार गुप्ता उतरौला बलरामपुर
दर्जन भर सरकारी भवन इतने जर्जर हैं कि कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। कार्यालयों में तैनात सरकारी कर्मी जान हथेली पर रखकर काम करने को विवश हैं। भवन मरम्मत का प्रस्ताव तो हर साल भेजा जाता है, लेकिन बजट के अभाव में काम नहीं हो पाता है। जर्जर स्कूल भवनों का मरम्मत भी नहीं हो पा रहा है। कुछ भवनों की दरकी हुई छतें कभी भी ढह सकती हैं।
बात शुरू करते हैं पशु चिकित्सालय के जर्जर भवन से। बताते हैं कि यह भवन करीब 50 साल पहले बनवाया गया था। बाद में इसे पशु चिकित्सालय के नाम हस्तांतरित कर दिया गया। भवन की स्थिति अत्यंत दयनीय है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है। कमरे में सीलन भरी है। छतें व दीवारें दरकी हुई हैं। जिस कमरे में पशु चिकित्सक डा.आनन्द प्रकाश सिंह बैठते हैं वहां खडे़ होने पर भी डर लगता है। सीलन इतनी है कि फर्श भी गीली रहती है। कर्मियों का आवास जर्जर है। ईएलओ राकेश कुमार गुप्ता व चतुर्थ श्रेणी कर्मी जग प्रसाद वर्मा बताते हैं कि आवास की दीवारें लटक गई हैं। बच्चों को घर में रखना खतरे से खाली नहीं था, इसलिए किराए पर आवास लेना पड़ा। चिकित्सीय परिसर में झाड़ियां उगी हुई हैं। कर्मियों की मानें तो वहां अक्सर जहरले सर्प निकलते रहते हैं। इस चिकित्सालय पर 60 ग्राम पंचायतों के मवेशियों के इलाज का जिम्मा है। चिकित्सक का कहना है कि वह दिन भर में 25 से 30 मवेशियों का इलाज करते हैं। दवाओं को सीलन से बचाने के लिए लोहे की अल्मारी खरीदनी पड़ी है। अपने निजी मद से परिसर की सफाई करवाते रहते हैं। लेकिन कुछ ही दिनों में झाड़ियां पुन: उग आती हैं। इसके पूर्व चिकित्सक ने भवन मरम्मत का प्रस्ताव मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को भेजा था। चहरदीवारी निर्माण का बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन भवन मरम्मत का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। उसे शासन से स्वीकृति नहीं मिली।
आवास के छतों से टपकता है पानी, खतरे में जिंदगानी
उतरौला के तहसील परिसर में राजस्व कर्मियों का दो मंजिले का दो आवास बना है। बताते हैं कि आवास लगभग 20 साल पहले बना था। भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। आवास में लेखपाल व अन्य राजस्व कर्मी निवास करते हैं। कर्मियों के अनुसार बरसात होने पर छतों से पानी टपकता है। खिड़कियां टूटकर बिखर गई हैं। दरवाजों के चौखट व बाजू उजड़ गए हैं। दीवारों के प्लास्टर उजड़कर गिर गए हैं। छतों से रोड़े निकलकर गिरते रहते हैं, जिससे चोटिल होने का खतरा बना रहता है। नीचे की फर्श दरक गई है। यहां तक कि सीढ़ियों की रेलिंग भी उखड़ने लगी है। लेखपाल ब्रम्हालाल, अखिलेश वर्मा व शास्त्री बताते हैं कि आवास में परिवार के साथ रहना खतरे से खाली नहीं है। पेयजल का कोई इंतजाम नहीं है। पानी की टंकी तो बनी है, लेकिन उसका संचालन शुरू नहीं किया जा सका। लोग हैंडपंप से पानी निकालकर दूसरे मंजिले तक ले जाते हैं। परिसर में झाड़ियां उगी हैं। जहरीले जीव जंतुओं का खतरा बना रहता है। तहसीलदार सत्यपाल प्रजापति ने बताया कि भवन मरम्मत का कोई बजट उनके पास नहीं है। प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।

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