Friday, April 10, 2026
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सचिव के शोषण से त्रस्त दि कानपुर यूनियन क्लब के कर्मचारियों ने पीएमओ में की ऑनलाइन शिकायत

कानपुर/लखनऊ (हि.स.)। कानपुर शहर के सबसे पुराने दि कानपुर यूनियन क्लब के सचिव सुरेश शर्मा पर कर्मचारियों ने आर्थिक शोषण करने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों ने इसकी शिकायत पीएमओ कार्यालय में की है। यहां के प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय न मिल पाने पर पीड़ित कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से न्याय की गुहार लगाई है। 

प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी गई शिकायत पत्र में कर्मचारी कन्हैया लाल यादव और अन्य कर्मचारियों की ओर से कहा गया है कि क्लब के सचिव सुरेश शर्मा विगत 15 वर्षां से इसी पद पर आसीन है। जब से वह इस पद पर बैठे हैं लगातार कर्मचारियों का ही आर्थिक शोषण करते आ रहे हैं। यह आरोप है कि करीब दो वर्षों से भी अधिक समय का प्रोविडेंट फंड एवं ईएसआई के पैसे भी नहीं जमा किये गए हैं। 
इसकी वजह से कर्मचारी अपना और अपने परिवार का इलाज भी ईएसआई अस्पताल से नहीं करवा पा रहे हैं। आरोप है कि क्लब के कर्मचारियों का वेतन नहीं बढ़ाया जा रहा है और कम से कम वेतन दिया जा रहा है। यही नहीं जो वेतन मिल रहा है उसे भी समय से उपलब्ध नहीं कराया जाता है। इसकी वजह से कर्मचारी अपने परिवार का पालन-पोषण भी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं।

नहीं सुन रहे प्रशासनिक अधिकारी 

यहां के कर्मचारियों का कहना है कि सचिव के लगातार आर्थिक शोषण से आजिज होकर जब उन्होंने यहां के प्रबंधन को शिकायत की तो उन्होंने भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। यहां के प्रशासनिक अधिकारियों से भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अधिकारियों ने मामले का संज्ञान नहीं लिया। ऐसे में अब एक उम्मीद की आस लेकर कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में ऑनलाइन शिकायत की है।  

करोड़ों रुपये डकार गए अधिकारी 

कर्मचारियों का कहना है कि अगर कोरोना काल को छोड़ दिया जाये तो क्लब की वार्षिक आय करीब 40 लाख रुपये से अधिक हैं। लेकिन यहां के सचिव और उससे जुड़े लोग इस आय को निजी जीवन में खर्च कर क्लब को बर्बाद करने में अमादा है। इसका नजीर क्लब में बन रहे स्वीमिंग पुल है। इसका निर्माण कार्य कराने के नाम पर करोड़ों रुपये डकार गये हैं। 

सचिव खुद को बताता है मुख्यमंत्री का करीबी 

कर्मचारियों का कहना है कि सचिव सुरेश शर्मा ने उन लोगों के साथ जो किया है वो शायद ही किसी अधिकारी ने अपने कर्मचारियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया होगा। कर्मचारी जब अपना वेतन बढ़ाने के लिए कहते हैं तो वह उन्हें नौकरी से हटाने की धमकी देता है। स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए सुरेश शर्मा अक्सर कर्मचारियों को कहते है कि उन्हें इस पद से मुख्यमंत्री ही हटा सकते हैं वर्ना किसी में इतनी ताकत नहीं है कि उन्हें यहां से हटा सके। 

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