-20 अक्टूबर को कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का करेंगे उद्घाटन
कुशीनगर(हि. स.)। बौद्धों की आस्था का प्रतीक पवित्र बोधि वृक्ष को सम्राट अशोक ने श्रीलंका से मधुर सम्बन्ध बनाने का आधार बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 अक्टूबर को कुशीनगर में श्रीलंकाई डेलिगेशन के साथ महापरिनिर्वाण मन्दिर के मूल वृक्ष से तैयार पौधे परिसर में रोपकर भारत-श्रीलंका सम्बन्धों को और मधुर व प्रगाढ़ करने का कार्य करेंगे।
प्रधानमंत्री यहां इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करने आ रहे हैं। इस कार्यक्रम में भाग लेने श्रीलंका का दल विशेष विमान से आ रहा है। बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे गौतम बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बाद में यही बोधि वृक्ष अशोक की विदेश नीति का आधार बना।
युद्धकाल के बाद सम्राट अशोक ने अपने पुत्र अशोक व पुत्री संघमित्रा को बोधि वृक्ष की टहनी लेकर श्रीलंका भेजा था, जो श्रीलंका में आज भी लहलहा रहा है। कार्यक्रम में भाग लेने श्रीलंका से कैबिनेट मंत्री के नेतृत्व में 125 सदस्यीय उच्चस्तरीय डेलिगेशन आ रहा है। श्रीलंकाई दल के साथ बोधिवृक्ष के पौधे रोपकर प्रधानमंत्री सम्राट अशोक की नीतियों को ताजा करेंगे।
बोधि वृक्ष के माध्यम से अशोक ने मध्य एशिया के देशों चीन, जापान,कम्बोडिया, थाईलैंड,म्यांमार आदि देशों से बोधि वृक्ष के माध्यम से अटूट सम्बन्ध कायम किए।
पूरी दुनिया के बौद्ध धर्मावलम्बियों के लिए यह पौधा धार्मिक रूप से काफी महत्व रखता है। बुद्ध धर्म के माध्यम से पूरे विश्व में शांति का आह्वान करने वाले भगवान बुद्ध को बोधगया के बोधि वृक्ष के मूल टहनियों से नए पौधे तैयार किये जाते हैं।
सम्राट अशोक के पदचिन्हों पर चलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो देशों के मध्य रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने का नया जरिया बनाया है। चीन यात्रा के दौरान उन्होंने बोधिवृक्ष के पौधे को चीनियों को भेंट कर भगवान बुद्ध के शांति के मार्ग की अहमियत को रेखांकित करने की कोशिश की थी।
मंगोलिया यात्रा के दौरान भी वहां के शासक को प्रधानमंत्री ने यह पौधा सौंपा था। इससे पहले भी अपनी विदेश यात्रा के दौरान पीएम बौद्ध धर्म को मानने वाले कई देश के प्रतिनिधियों को यह पौधा सौंप चुके हैं। कोरिया, थाइलैंड, नेपाल एवं वियतनाम भी इसमें शामिल हैं
भूटान के प्रधानमंत्री को बोधगया दौरे के दौरान ही बोधि वृक्ष का पौधा सौंपा गया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का उद्यान विभाग, वन विभाग पौधरोपण की तैयारियां कर रहा है।
यह पौधा विशेष देहरादून से मंगाया गया है। बोधि वृक्ष का पौधा देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों की देखरेख मे तैयार होता है।
मूल रूप से श्रीलंका के निवासी और जापान-श्रीलंका बौद्ध बिहार कुशीनगर के प्रबन्धक/ प्रमुख बौद्ध ने बताया कि बोधि वृक्ष दुनिया भर की के बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों की आस्था का प्रतीक है। यह हमारे लिए अत्यंत ही पवित्र है।
