Tuesday, February 10, 2026
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श्रीराम मंदिर निर्माण : एक दिन सबरी का इंतजार हुआ था खत्म, आज हमारी बारी

कानपुर(हि.स.)। आस्था के समुद्र में डूबा भारत देश उस दिन के इंताजर में अपनी पलकों को इस कदर बिछाये बैठा है जैसे सदियों से प्रभु श्री राम का इंताजर करने वाली सबरी जिन्होंने अपनी उम्र के अंतिम दौर में प्रभु श्रीराम के दर्शन कर मोक्ष प्राप्त किया था। ऐसा ही इंतजार देश के लाखों कारसेवक और करोड़ों रामभक्त भी कर रहे हैं, जिन्होंने शुरुआत से लेकर आजतक प्रभु को उनके घर पर आसीन करने के लिये खुद को समर्पित कर दिया। उनका इंतजार खत्म हो रहा है और मात्र 09 दिन के बाद मर्यादा के शिरोमणि प्रभु श्री राम अयोध्या में आ रहे हैं। आखों में आशा के दीप जलाये कानपुर के सैंकड़ों कार सेवक उनके स्वागत में जनपद को इस कदर सजाने में लगे हैं मानो उस दिन दीपावली का पर्व हो। उस दिन का यह नजारा आखिर देखने योग्य भी होने वाला है। श्रीराम मंदिर आंदोलन में कानपुर के डीएवी कॉलेज के प्रोफेसर रहे डॉ देवी शरण शर्मा और अशोक सिंह दद्दा ने भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण में अपने उन दिनों की स्मृतियां हिन्दुस्थान समाचार के संवाददाता अवनीश अवस्थी से साझा की।

उन्होंने बताया कि 1990 में वह डीएवी कॉलेज के प्रोफेसर रहे डॉ देवी शरण शर्मा की अगुवाई में जानकी प्रसाद शर्मा, देवी चरण बाजपेई, अरुणेश मिश्रा और पतंजलि शर्मा के साथ तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के स्वागत में कानपुर सेंट्रल स्टेशन पहुंचे थे। जिसमें उनको छोड़कर लगभग सभी लोग गिरफ्तार हो गये थे। उस वक़्त लाल कृष्ण आडवाणी को राम मंदिर आंदोलन को मुख्य माना जाता था। जिसको लेकर तत्कालीन सरकार ने राजधानी एक्सप्रेस के आने से पहले ही पूरा जाल स्टेशन पर बिछा चुकी थी। ख़ुफ़िया विभाग लगातार वहां की मॉनिटरिंग कर रहा था। सरकार और शासन का पूरा प्रयास था भाजपाई और कार सेवक स्टेशन तक न पहुंच सकें। लेकिन डॉ देवी शरण शर्मा और अशोक सिंह दद्दा के साथ दो दर्जन से अधिक लोग स्टेशन पर पहुँच गये। पुलिस ने घेराबंदी कर उनको घेर लिया।

उन्होंने बताया कि 22 जनवरी 2024 को पूरे जनपद में दीपावली से बेहतर माहौल रहने वाला है। पूरा जनपद दीपों की रोशनी से चमकने वाला है। मंदिरों में भजन होंगे और प्रसाद वितरण होगा। अशोक सिंह दद्दा ने कहा कि एक दिन जब माता सबरी का इंतजार खत्म हुआ था और प्रभु ने उनको दर्शन दिये थे, तो आज पूरा विश्व उनके दर्शन के इंतजार में बैठा है आखिर इस दिन को हम कैसे भूल पाएंगे। इतिहास में यह दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा।

अवनीश/मोहित

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