अयोध्या (हि.स.)। भारत में भगवान श्रीराम की स्वीकार्यता जन-ज़न में है, लेकिन अयोध्या के दीपोत्सव में य़ह स्वीकार्यता वैश्विक स्तर पर परिलक्षित होने लगती है। विदेशी धरती के सधे कलाकारों द्वारा की जाने वाली श्रीरामलीलाएं अनायास ही इसे विश्व फलक पर फैला देती हैं।
दीपोत्सव के अवसर पर देश-विदेश की नामी-गिरामी श्रीरामलीलाओं का मंचन होता है। यहां आकर अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले विदेशी कलाकार न सिर्फ लोगों को आनंदित करते हैं बल्कि श्रीराम की स्वीकार्यता को विश्व फलक पर पुष्ट भी करते हैं।
दीपोत्सव में होने वाले कार्यक्रमों की शृंखला में स्थानीय कलाकारों को भी अपना फन दिखाने का मौका भी भरपूर मौका मिलता है तो दूसरी ओर अलग-अलग देशों के कलाकार भी अपना हुनर दिखाने अयोध्या पहुंचते हैं। जहां स्थानीय कलाकार य़ह पुष्ट करतेहैं कि भारत में श्रीराम का चरित्र ज़न ज़न में समाहित है तो वहीं विदेशी कलाकारों द्वारा खेली जाने वाली श्रीरामलीलाओं में भगवान राम की वैश्विक स्वीकार्यता परिलक्षित होती है।
अब तक के पांच दीपोत्सव के दौरान इंडोनेशिया, श्रीलंका, त्रिनिदाद, रूस, लाओस, कम्बोडिया, नेपाल, फिलीपींस, फिजी जैसे विदेशी कलाकारों ने भगवान श्रीराम की लीला का मंचन किया है और श्रीराम के चरित्र को अपने देश के व्यक्तित्व के रूप में सिद्ध करने की मंचीय कोशिश की है। तो जम्मू कश्मीर, असम, गुजरात, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल जैसे अहिंदीभाषी प्रदेशों के रामलीला दल अयोध्या में अपनी परंपरा के अनुसार रामलीलाओं का मंचन कर चुके हैं।
आमोद
