नाका हिन्डोला स्थित ऐतिहासिक गुरूद्वारा में सजाया गया दीवान
लखनऊ( हि.स़.)। सरबंसदानी साहिब श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी महाराज के चारों साहिबजादों (साहिब अजीत सिंह जी, साहिब जुझार सिंह जी, साहिब जोरावर सिंह जी, साहिब फतहि सिंह जी) व माता गुजर कौर जी का शहीदी दिवस आज यानि गुरूवार को लखनऊ में बड़ी श्रद्धा एवं सत्कार के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शबद-कीर्तन हुआ और लंगर का आयोजन हुआ।
नाका हिन्डोला स्थित ऐतिहासिक गुरूद्वारा श्री नानक देव जी में हजूरी रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह ने पवित्र आसा दी वार का शबद कीर्तन समूह संगत को निहाल किया। सहज पाठ की समाप्ति के उपरान्त मुख्य ग्रन्थी ज्ञानी संच्चा सिंह जी पटियाला वालों ने कथा व्याख्यान करते हुए बताया कि सन् 1704 में चमकौर की गढ़ी में श्री गुरू गोबिन्द सिंह जी के बडे़ साहिबजादे बाबा अजीत सिंह एवं बाबा जुझार सिंह ने 10 लाख मुगल फौज का सामना करते हुए शहादत प्राप्त की। छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह एवं बाबा फतहि सिंह ने जब इस्लाम कबूल नहीं किया तो उन्हें सरहंद के नवाब ने जिन्दा ही नीव में चुनवा दिया। पोतों की शहादत के बाद माता गुजर कौर जी ने भी अपने प्राण त्याग दिये।
उनकी शहादत को याद करते हुए सुखमनी साहिब सेवा सोसाइटी के सदस्यों ने ‘मित्तर प्यारे नूँ हाल मुरीदां दा कहना‘ व सिमरन साधना परिवार के बच्चों ने ‘सूरा सो पहचानिअै लरै दीन के हेत। पुरजा-पुरजा कट मरे कबहु न छाडै़ खेत।।‘ शबद- कीर्तन गायन कर समूह संगत को भाव विभोर किया।
इसके अलावा रागी जत्था भाई चमनजीत सिंह जी लाल दिल्ली वालों ने भाई इन्दरजीत सिंह जी सादिक जी अमुतसर वालों ने भाई गुरमीत सिंह जी ऊना साहिब वालों ने गायन कर समूह संगत को निहाल किया। दिन भर गुरबाणी कीर्तन और गुरमत विचारों का कार्यक्रम चला। संचालन सतपाल सिंह मीत ने किया।
दीवान की समाप्ति के उपरान्त लखनऊ गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह बग्गा जी ने चारों साहिब जादों एवं माता गुजर कौर की शहादत को एक बड़ी शहादत कहा और अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये। समागम में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पंजाबी महासभा के अनिल वर्मानी, राजकुमार बत्रा, पवन मनोचा और सुरेश तेजवानी का हार्दिक आभार प्रकट किया।
समागम में लंगर के वितरण की सेवा हरमिन्दर सिंह टीटू एवं कुलदीप सिंह सलूजा , इंदरजीत सिंह की देखरेख में दशमेश सेवा सोसाइटी के सदस्यों द्वारा की गयी। जोड़ा घर में जूते-चप्पल की सेवा सिक्ख सेवक जत्थे के राजवन्त सिंह बग्गा, कुलवन्त सिंह तथा अन्य सदस्यों ने की।
शैलेंद्र मिश्रा
