– 38 हजार से अधिक लोगों ने ली पोषण की शिक्षा
कानपुर (हि.स.)। कुपोषण से मुक्ति के लिए बाल तथा महिला विकास विभाग द्वारा पोषण पाठशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन जिले के एनआईसी सहित सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुआ। इसमें बच्चों के साथ-साथ गर्भवती तथा धात्री महिलाओं को पोषण योजनाओं के लाभ की जानकारी दी गई। स्मार्टफोन के जरिए करीब 1778 आंगनबाड़ियों सहित 36096 लोगों को प्रसारण दिखाया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश प्रताप सिंह ने बताया कि पोषण पाठशाला कार्यक्रम के आयोजन के दौरान विशेषज्ञों में डॉ रेनू श्रीवास्तव, डॉ मोहम्मद सलमान खान और डॉ मनीष कुमार सिंह ने विस्तार पूर्वक स्तनपान के संदर्भ में खास जानकारियां दीं।
उन्होंने बताया कि पोषण पाठशाला कार्यक्रम की मुख्य थीम शीघ्र स्तनपान केवल स्तनपान थी। पोषण पाठशाला में अधिकारियों के अतिरिक्त विषय विशेषज्ञ शीघ्र स्तनपान केवल स्तनपान की आवश्यकता महत्व, उपयोगिता आदि पर हिन्दी में चर्चा की गयी। बाल विकास विभाग की ओर से लोगों को विभाग की सेवाओं, पोषण प्रबंधन, कुपोषण से बचाव के उपाय, पोषण शिक्षा आदि के बारे में जागरुक किया गया साथ ही छह माह तक केवल स्तनपान का संदेश दिया गया। इस पाठशाला में बाल विकास परियोजना अधिकारी, मुख्य सेविका, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के लाभार्थी, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताओं ने प्रतिभाग किया।
उन्होंने बताया कि प्रचलित मिथकों के कारण केवल स्तनपान सुनिश्चित नहीं हो पाता है। मां एवं परिवार को लगता है कि स्तनपान शिशु के लिए पर्याप्त नहीं है और वह शिशु को अन्य चीजें जैसे कि घुट्टी, शर्बत, शहद और पानी आदि पिला देती है जबकि स्तनपान से ही शिशु की पानी की भी आवश्यकता पूरी हो जाती है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) के अनुसार उत्तर प्रदेश में शीघ्र स्तनपान (जन्म के एक घंटे के अंदर नवजात शिशु को स्तनपान ) की दर 23.9 प्रतिशत है और छह माह तक के शिशुओं में केवल स्तनपान की दर 59.7 प्रतिशत है। जबकि जनपद में छह माह तक के शिशुओं में केवल स्तनपान की दर 53.9 प्रतिशत है। उन्होंने कहा माह मई व जून में प्रदेश में पानी नहीं, केवल स्तनपान अभियान चलाया जा रहा है।
जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान जरुरी
यूनीसेफ के मंडलीय पोषण सलाहकार आशीष का कहना है कि मां का दूध शिशु के लिए अमृत के समान है। शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने के लिए यह आवश्यक है कि जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान प्रारंभ करा देना चाहिए व छह माह की आयु तक उसे केवल स्तनपान कराना चाहिए।
महमूद
