Wednesday, January 14, 2026
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शिव-शक्ति व भक्ति का समागम, आरएसएस प्रमुख ने रामदूत को चढ़ाया 51 मन लड्डू

– मां विंध्यवासिनी से राष्ट्र के उत्थान की कामना कर गए मोहन भागवत

– देवरहा बाबा आश्रम पर मोहन भागवत का कड़ी सुरक्षा के बीच एक दिवसीय प्रवास

– सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट निर्माणाधीन विंध्य कॉरिडोर को देखा, ली जानकारी

मीरजापुर(हि.स.)। विंध्य दरबार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मंगलवार की सुबह मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन कर प्रयागराज प्रस्थान कर गए। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्माणाधीन ड्रीम प्रोजेक्ट को भी देखा और कुछ महत्वपूर्ण जानकारी ली।

विंध्याचल के महुआरी कलां स्थित देवरहा बाबा आश्रम पर शिव-शक्ति व भक्ति का समागम दिखा। दरअसल, शक्ति नगरी मां विंध्यवासिनी धाम में काशी विश्वनाथ भगवान शिव की नगरी के कारीगर ने शुद्ध देशी घी के 51 मन लड्डू बनाए और उसे आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रामदूत भगवान हनुमान को चढ़ाया।

विंध्याचल के महुआरी कला स्थित देवरहा बाबा आश्रम पहुंचे मोहन भागवत ने देवरहा हंस बाबा के सत्संग में बाबा के विचारों को सुना। रात्रि विश्राम कर मंगलवार की सुबह आश्रम स्थित हनुमान मंदिर में 51 मन लड्डू चढ़ा पूजन-अर्चन किया और कैलाश मानसरोवर को शीघ्र भारत वापस लाने व अखंड भारत को विश्वगुरू बनाने की कामना की। साथ ही आश्रम में नवनिर्मित मानस भवन का उद्घाटन किया, फिर मोहन भागवत ने देवरहा हंस बाबा का आशीर्वाद लिया। इसके बाद विंध्यधाम पहुंचकर मां विंध्यवासिनी के चरणों में शीश नवाया। पांच पुरोहितों ने मंत्रोच्चारण के बीच पूजन कराया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, प्रांत प्रचारक रमेश जी, विभाग प्रचारक परितोष, केशव, शैलेश, संतोष, अनिल, स्वयंसेवक आदि थे।

कैलाश मानसरोवर वापस लाने व भारत को विश्वगुरु बनाने की कामना

कैलाश मानसरोवर को शीघ्र वापस लाने व राष्ट्र के उत्थान की कामना को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तीसरी बार देवरहा बाबा आश्रम आए थे। आरएसएस प्रमुख ने संघ के पदाधिकारियों से मुलाकात की।

विंध्यवासिनी मंदिर पर 45 मिनट तक रोक

देवरहा बाबा आश्रम से लेकर विंध्याचल पूरी तरह कड़ी सुरक्षा घेरे में था। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के आने की सूचना पर मंदिर पर सन्नाटा छा गया। लगभग 45 मिनट तक मंदिर पर आम श्रद्धालुओं के आवागमन पर रोक लगा दी गई थी। आरएसएस प्रमुख दर्शन-पूजन के बाद प्रयागराज के लिए रवाना हो गए।

कमलेश्वर शरण

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