-प्रशंसकों और परिजनों ने मकबरे पर खेराज-ए-अकीदत पेश की
वाराणसी (हि.स.)। शहनाई के शहंशाह भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की रविवार को 16वीं पुण्यतिथि मनाई गई। दरगाह फातमान स्थित उस्ताद के मकबरे पर परिजनों और प्रशंसकों ने फातिहा पढ़ी और गुलाब की पंखुरियां अर्पित की। गुलपोशी के साथ ही शहनाई की धुन भी मकबरे पर गूंजी। बिस्मिल्लाह खां का पसंदीदा नौहा मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का पढ़ा गया।
21 अगस्त 2006 को उस्ताद की 92 साल की अवस्था में इंतकाल हो गया था। उस्ताद ने गंगा किनारे बालाजी घाट स्थित मंदिर पर लगभग 40 साल तक शहनाई का रियाज किया। 6 साल की उम्र से ही बनारस में शहनाई बजाने लगे थे। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का जन्म बिहार के बक्सर जिले में हुआ था, लेकिन बचपन से लेकर जिंदगी का आखिरी वक्त काशी में बीता। वर्ष 2001 में तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी की अटल सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया ।
उस्ताद ऐसे बनारसी थे जो गंगा में वज़ू करके नमाज़ पढ़ते थे और सरस्वती को प्रणाम कर शहनाई की तान छेड़ते थे। पुण्यतिथि पर मकबरे पर श्रद्धासुमन अर्पित करने आये उस्ताद बिस्मिल्लाह खां फाउंडेशन के प्रवक्ता शकील अहमद जादूगर ने मकबरे पर जनप्रतिनिधियों के न पहुंचने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बनारस में कई विधायक और मंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है,लेकिन यहां आना जरूरी नहीं समझते। उस्ताद की कब्र पर अकीदत के फूल चढ़ाने का वक्त उनके पास नहीं है।
परिजनों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के मकान को भव्य संग्रहालय में बदलने की मांग भी की। पुण्यतिथि पर उस्ताद के पौत्र रफ्फाक हैदर, कांग्रेस के पूर्व विधायक अजय राय के पुत्र शांतनु राय, प्रमोद वर्मा, सैयद फरमान हैदर, फिरोज हुसैन आदि ने श्रद्धासुमन अर्पित किया।
श्रीधर
