Wednesday, April 1, 2026
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शक के आधार पर किसी भी महिला की न हो गिरफ्तारी: डीजीपी

लखनऊ(हि.स.)। राज्य सरकार ने महिलाओं, बुजुर्गों और नाबालिगों को थाने में बुलाकर पूछताछ और बेवजह गिरफ्तारी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में पुलिस महानिदेशक डीएस चौहान का भी बयान सामने आया है कि जब तक किसी मामले में पुख्ता सबूत न हों, संदेह के आधार पर महिलाओं की गिरफ्तारी न करें। पुलिस अधिकारी इस आदेश का सख्ती से पालन करें।

डीजीपी ने अपने सर्कुलर में सर्वोच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा कि महिलाओं की गिरफ्तारी और पूछताछ के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय से कई बार रुलिंग आ चुकी है। ऐसे में आदेशों के अनुपालन में किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने अपने निर्देश में कहा कि सभी थानाप्रभारियों, उपनिरीक्षक और विवेचकों द्वारा किसी महिला को पूछताछ के लिए थाने में नहीं बुलाया जाएगा। पुलिस के पास जब तक ठोस सबूत न हो तो किसी भी महिला की गिरफ्तारी केवल संदेह के आधार पर नहीं होनी चाहिए। अगर किसी अपराध में महिलाओं से पूछताछ जरूरी है, तो ऐसे हालात में उनके घर जाकर परिवार की मौजूदगी में पूछताछ पुलिस कर सकती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने सात साल से कम सजा वाले मामलों में होने वाली गिरफ्तारी के नोटिस को लेकर सभी राज्यों की पुलिस को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा है कि महिलाओं, नाबालिगों, 65 साल से अधिक आयु के लोगों और मानसिक-शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को उसके निवास स्थान के अलावा कहीं और पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जाएगा। इस निर्देश का अनिवार्य रूप से पालन कराने को भी कहा है।

दीपक

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