Wednesday, January 14, 2026
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वैज्ञानिक संगोष्ठी में अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोगों पर हुई चर्चा

ब्रेन स्ट्रोक व ब्रेन हेमरेज में समय का बहुत महत्व : डॉ. फड़के

प्रयागराज (हि.स.)। इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन एवं अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ ने संयुक्त रूप से इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन प्रयागराज के सभागार में एक वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया। जिसमें प्रदेश के जाने-माने चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र में हो रही प्रगति एवं अत्याधुनिक तकनीक के प्रयोगों पर चर्चा की।

इस अवसर पर इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सुजीत सिंह ने बताया कि पूरे विश्व में चिकित्सा के क्षेत्र में प्रतिदिन नई-नई तकनीकों का प्रयोग हो रहा है। जिससे जटिल बीमारियों का इलाज पहले से कहीं ज्यादा सरल और प्रभावशाली हो गया है। पिछले 2 सालों में कोरोना महामारी के चलते पूरे विश्व में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया और इसी कारण चिकित्सा क्षेत्र में रिसर्च का कार्य और तेजी से बढ़ा है।

मुख्य वक्ता आर.वी फड़के विभागाध्यक्ष इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक व ब्रेन हेमरेज में समय का बहुत महत्व होता है। यदि पीड़ित रोगी स्ट्रोक के 4 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंच जाता है तो पूरी तरह ठीक होने की सम्भावना बढ़ जाती है और फालिज का भी कोई असर नहीं रह जाता। अत्याधुनिक तकनीक द्वारा दिमाग में खून के थक्के या खून के रिसाव को बिना चीरा लगाए एक पतले तार द्वारा सर्जरी कर दी जाती है, जिसके परिणाम और बेहतर होते हैं।

अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ के गैस्ट्रो सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. वलीउल्लाह सिद्दीकी ने बताया कि लिवर ट्रांसप्लांट के बारे में समाज में कई सारी भ्रांतियां हैं। जिस कारण आज भी लोग लिवर ट्रांसप्लांट करवाने में घबराते हैं। परंतु अब लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आसान हो गई है। यदि आंकड़ों की बात की जाए तो 90 से 95 प्रतिशत लिवर ट्रांसप्लांट सर्जरी सफल होती है। यदि रोगी ट्रांसप्लांट के बाद एक स्वस्थ जीवन शैली का पालन करें और अपने डॉक्टर के नियमित फॉलो अप में रहे। अब लीवर देने वाले दाता को कोई खतरा नहीं होता है और सर्जरी के 3 से 6 महीने के भीतर वह अपनी पुरानी दिनचर्या में वापस आ सकता है और एक सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन व्यतीत कर सकता है।

अपोलो लखनऊ के वरिष्ठ हृदय सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. विजयंत देवेनराज ने बताया कि हृदय सर्जरी समय के साथ-साथ बहुत एडवांस हो गई है और अत्याधुनिक तकनीक की मदद से अब बहुत ही छोटे चीरे द्वारा बाइपास सर्जरी और वॉल्व की सर्जरी संभव है। इसे ’मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी कहा जाता है। इस प्रकार की सर्जरी में कम रक्तस्त्राव होता है और सर्जरी के पश्चात रोगी को अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल जाती है।

यह जानकारी एएमए पीआरओ डॉ. अनूप चौहान ने रविवार को दी। बताया कि संगोष्ठी में चेयरपर्सन डॉ.कमल सिंह, डॉ.प्रोबाल नियोगी, डॉ.शबी अहमद और डॉ. पंकज कामरा सहित डॉ. आर.के.एस चौहान, डॉ.शार्दूल सिंह, डॉ.सुबोध जैन, डॉ. जी.एस सिन्हा, डॉ.युगान्तर पाण्डेय, डॉ.सुभाष वर्मा, डॉ.अभिनव अग्रवाल, डॉ.उत्सव सिंह आदि मौजूद थे। संगोष्ठी का संचालन संयुक्त सचिव डॉ.संतोष सिंह और महिला विंग की सचिव डॉ.पारूल माथुर ने किया तथा भविष्य में ऐसी ज्ञानवर्धक संगोष्ठियां आयोजन कराने का आश्वासन दिया और अन्त में वक्ताओं और श्रोताओं को धन्यवाद दिया।

विद्या कान्त

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