प्रयागराज (हि.स.)। इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन में रविवार को डेंगू के लक्षण और निवारण विषय पर वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें प्रो कचनार वर्मा तथा प्रो अनुभा श्रीवास्तवा ने अपने व्याख्यान दिये।
संगोष्ठी में डॉ कचनार वर्मा ने डेंगू बुखार के लक्षण, कारण, निवारण पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह एक विश्वव्यापी बीमारी है, जो 70 प्रतिशत एशिया में बरसात के मौसम में तीव्र होती है। यह दिन में काटने वाले ऐडिस मच्छर द्वारा फैलाई बीमारी है, जो प्राणघातक भी साबित हो सकती है। डेंगू बुखार में शरीर में दर्द होना, बुखार आना जैसे लक्षण होते हैं। इन लक्षणों के साथ पेट में दर्द, उल्टियां होना, पेशाब कम होना, बेहोशी आना इस गम्भीर डेंगू के लक्षण होते हैं। डेगू में शरीर पर चकत्ते दिखाई देते हैं एवं प्लेटलेट्स कम हो जाते हैं।
उन्होंने बताया कि मात्र प्लेटलेट्स चढ़ाना ही इसका निदान नहीं है, कुछ विशेष परिस्थिति में सामान्यतः 20 हजार से कम होने पर ही प्लेटलेट्स चढ़ायी जानी चाहिए। कहा कि इसे चढ़ाने के दो तरीके हैं जिसमें पहला कई डोनरों से एकत्र किया हुआ प्लेटलेट्स मरीज को देते हैं, किन्तु इसमें मरीज को कम लाभ होता और भविष्य में दुष्परिणामों की सम्भावना ज्यादा होती है। दूसरा आधुनिक तरीका जिसे एफेरेसिस कहते हैं जो सिर्फ एएमए ब्लड बैंक में उपलब्ध है, इसमें उच्च कोटि की सिर्फ एक डोनर से ली गयी प्लेटलेट्स के कारण मरीज को अधिक लाभ होता है।
प्रो0 अनुभा श्रीवास्तवा ने बताया कि मात्र प्लेटलेट्स पर ही सारा ध्यान केन्द्रित न करके मरीज के हाइड्रेशन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। मरीज को लगातार ओआरएस का घोल, फलों का रस आदि देते रहना चाहिए व उसके पेशाब की मात्रा नापते रहना चाहिए। जिन मरीजों का इलाज घर पर हो रहा हो उनको भी इसके गम्भीर लक्षणों के बारे में सूचित कर देना चाहिए।
संगोष्ठी की अध्यक्षता एएमए अध्यक्ष डॉ एम.के मदनानी एवं संचालन संयुक्त सचिव प्रो0 डॉ अभिनव अग्रवाल तथा धन्यवाद ज्ञापन सचिव डॉ राजेश मौर्या ने किया। संगोष्ठी में डॉ अलोक खरे, डॉ सुबोध जैन, डॉ जी.एस सिन्हा, डॉ अनिल अग्रवाल, डॉ सुजीत सिंह, डॉ युगान्तर पाण्डेय, डॉ अनूप चौहान, डॉ संतोष सिंह, डॉ मोहित जैन, डॉ उत्सव सिंह आदि उपस्थित रहे।
