सिंगल डोज 82 प्रतिशत तक मौतों को रोक सकती
नई दिल्ली । देश में कोरोना की तीसरी लहर को रोकने के लिए वैक्सीनेशन को जरुरी बताया गया है।वैक्सीनेशन के बाद कोरोना से होने वाली मौतों को रोकने में मदद मिल रही है। यह बात हाल ही में आईसीएमआर ने फ्रंटलाइन वर्कर्स पर स्टडी करने के बाद कहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के डायरेक्टर जनरल डॉ. बलराम भार्गव का कहना है कि हाल ही में देशभर में फ्रंटलाइन वर्कर्स पर स्टडी की गई है। इसमें एक लाख से ज्यादा फ्रंटलाइन वर्कर्स को शामिल किया था।शोध में पाया गया है कि वैक्सीन की दोनों डोज कोरोना से होने वाली मौतों के खिलाफ 95 प्रतिशत तक सुरक्षा देती है। वहीं कोरोना वैक्सीन की सिंगल डोज 82 प्रतिशत तक मौतों को रोक सकती है। डॉ. भार्गव का कहना है कि स्टडी में पाया गया है कि अगर व्यक्ति को वैक्सीन की दोनों डोज लगी हो और उसमें कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े को देखा जाए,तब एक लाख में से केवल 6 मौतें ही दोनों डोज के बाद हो सकती हैं। वहीं सिंगल डोज के बाद एक लाख में से 21 लोगों की ही जान जा सकती है।
आईसीएमआर की स्टडी से साफ जाहिर होता है कि जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं ली है, उन लोगों में मौतों का आंकड़ा बेहद ज्यादा है। इसके बाद यह जरूरी है कि वे लोग जल्द से जल्द वैक्सीन लें। डॉ. भार्गव का कहना है कि हमारी स्टडी में पाया गया है कि इस वक्त जो वैक्सीन हम देश में लगा रहे हैं, वह अल्फा, डेल्टा जैसे वैरियंट पर कारगर है और लोगों को अच्छी सुरक्षा मिलती है। कोविशील्ड, कोवैक्सीन में से कोई भी वैक्सीन लगवा सकते हैं। वैक्सीन का मकसद कोरोना से होने वाली गंभीरता और मौतों को रोकना है।वहीं आईसीएमआर का कहना है कि तीसरी वेव में बच्चों के ज्यादा संक्रमित होने का कोई प्रमाण नहीं मिलता है, इसकारण फिलहाल यह कहना गलत होगा कि बच्चों पर अब ज्यादा खतरा है। हालांकि इसके बावजूद बच्चों की वैक्सीन जल्द से जल्द लाने की तैयारी की जा रही है। कोवैक्सीन का बच्चों पर ट्रायल चल रहा है और उम्मीद है कि सितंबर तक इस लेकर एक अच्छी खबर सुनने को मिलेगी।
वैक्सीन की दोनों डोज लगाने के बाद मौत नहीं होने के 95 प्रतिशत चांस
RELATED ARTICLES
