Sunday, April 5, 2026
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वृंदावन से लेकर अवध तक कानपुर का अबीर और गुलाल फगुआ में मचाएगा धमाल

अजय सिंह

यशोदा नगर में इन दिनों जोरों पर बन रहा है सुगंधित रंग, खेतों में लगे हैं ढेर

कानपुर (हि.स.)। रंगों का त्योहार होली के नजदीक आते ही लोगों का मन उत्साहित होने लगता है और पहले से तैयारी की जाती है कि इस त्योहार को रंगों के साथ खुशनुमा माहौल मनाना है। आपसी भाईचारे के इस त्योहार में रंगों की गुणवत्ता पर विशेष ख्याल रखा जाता है तो वहीं कानपुर के यशोदा नगर में लोगों की भावनाओं के अनुरुप अबीर और गुलाल बनाये जा रहे हैं। यह अबीर और गुलाल वृंदावन से लेकर अवध तक फगुआ में धमाल मचाने को तैयार है। 

होली का त्योहार करीब आते ही लोगों के मन में फिल्म शोले के अदाकारा ठाकुर के गांव में फगुआ का दृश्य सामने आने लगता है। लोगों की इच्छा होती है कि ऐसा ही आपसी भाईचारा लिए खुशनुमा दृश्य अपने आस—पास भी हो, लेकिन इसके लिए जरुरत होती है मानक के अनुरुप सुगंधित रंगों की। इसी को लेकर त्योहार आने से पहले कानपुर के यशोदा नगर में रंग बनाने की तैयारी जोरों पर शुरु हो जाती है। इन दिनों इस इलाके तैयार किये जा रहे अबीर गुलाल का कार्य जोरो से चल रहा है। यही नहीं तैयार रंग प्रदेश और शहर के कई हिस्सों में भेजने का सिलसिला भी शुरु हो गया है। जिसको लेकर व्यापारी ज्यादा से ज्यादा माल तैयार करने में लगे हुए हैं। शहर के अबीर और गुलाल की पूरे प्रदेश में सप्लाई की जाती है क्योंकि कानपुर को रंगों का किंग भी माना जाता है। जिसको लेकर प्रदेश के कई जिलों से लोग यहां पर रंग खरीदने के लिए आते हैं। जिधर नजर दौड़ाओं दिख रहा है अबीर और गुलाल
यशोदा नगर इलाके में इन दिनों जिधर भी नजर दौड़ाओ बस अबीर और गुलाल से लदे हुए खेत ही खेत दिखाई पड़ते हैं। वैसे तो खेतो में गेहू चना और सब्जियां बोई जाती है, लेकिन शहर का यह इलाका इन दिनों पूरी तरह होली के रंगों में रंगा हुआ दिखाई देता है फिर क्या गली और क्या खेत हर तरफ अबीर और गुलाल के ढेर ही दिखाई देते हैं। अबीर और गुलाल के बड़े—बड़े ढेर पर महिलायें और पुरुष काम करते हुए होली की तैयारी में जुटे हुए है। यहां पर अबीर और गुलाल को साफ तरीके से तैयार किया जाता है और सप्लाई के लिए बहार भेज दिया जाता है।
हर चौथे घर पर बनता है रंग और गुलाल यहां पर लगभग हर चौथे घर में अबीर और गुलाल बनाया जाता है। चूंकि यह इलाका शहर से हटकर है इस लिए यहां आराम से रंगों को सुखाया जाता है। रंग कारोबारी श्याम यादव ने बताया कि हमारे यहां अबीर और गुलाल ही बनाया जाता है और इसे बनाने में विशेष ख्याल रखा जाता है, क्योंकि शहर से यह माल मथुरा वृन्दावन, आगरा, लखनऊ गोरखपुर, बस्ती, गाजियाबाद मेरठ तक जाता है।
इस तरह तैयार होता है रंग
रंग कारखाना के मालिक किशोर गुप्ता ने बताया कि रंग और गुलाल तैयार करने के लिए हम लोग आरारोट का इस्तेमाल करते हैं और उसमे रंग मिला देते है जिस रंग का माल देना होता है वह रंग आरारोट में मिलाकर उसे मशीन में मिलाते हैं। मिलाने के दौरान उसमें पानी भी डालते है और जब सही तरीके से रंग मिल जाता है तो उसको मशीन से निकाल कर बाहर खेतों में सूखने के लिए डाल देते हैं और करीब दो घंटे में जब वह पूरी तरह सूख जाता है तब उसकी छनाई कराई जाती है और उसमे निकलने वाली गंदगी और बाहर फेक दिया जाता है। इसके बाद उसमें सुगंध के लिए सेंट भी डाला जाता है और उसके बाद उसकी पचास किलो और तीस किलो की पैकिंग कर उसकी सप्लाई भेज दी जाती है।

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