मेरठ (हि.स.)। सिर में दर्द, आंखों की रोशनी कमजोर होनो, व्यक्तित्व में परिवर्तन, याद्दाश्त कमजोर होना, जी मिचलाना, थकान, चिंता, अवसाद आदि ब्रेन ट्यूमर के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देते ही तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लें। ब्रेन ट्यूमर के लक्षण सामान्य और विशेष दोनों हो सकते हैं। समय पर पता चलने से इसे कैंसर में बदलने से रोका जा सकता है।
खानपान और जीवन शैली में अनियमितता,, प्रदूषित आबोहवा के कारण लोगों कई जानलेवा बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। लापरवाही के कारण ये बीमारियां कई बार बहुत खतरनाक रूप धारण कर लेती है। ऐसी बीमारियों में ब्रेन ट्यूमर भी लोगों को अपनी चपेट में ले लेता है। यह बहुत ही खतरनाक बीमारी है और लापरवाही से कैंसर का रूप धारण कर लेती है। इसमें मस्तिष्क का एक हिस्सा से ठीक से काम करना बंद कर देता है। इसके साथ ही आंखों की रोशनी कम होना, शरीर में एक ओर जकड़न, संतुलन ना बनना, जी मिचलाना, उल्टी, थकान, चिंता या अवसाद, व्यक्तित्व में परिवर्तन आना, जल्दी-जल्दी मूड बदलना, बोलने में कठिनाई होना आदि के लक्षण भी उबर आते हैं।
यह है विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस का इतिहास
वर्ष 2000 से विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस 08 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरूआत जर्मनी में जर्मन ब्रेन ट्यूमर एसोसिएशन (ड्यूश हिरटूमोरहिल्फ ईवी) द्वारा आयोजित किया गया था। यह संगठन ब्रेन ट्यूमर के बारे में लोगों को जागरूक करता है। इसके बाद से ही प्रत्येक वर्ष 08 जून को विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस मनाया जाता है।
जाने-माने न्यूरो सर्जन डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता का कहना है कि लापरवाही बरतने से कई बार कैंसर का रूप ले लेता है। ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। लक्षण महसूस होते ही तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए।
सिरदर्द के साथ उल्टी और धुंधलापन ब्रेन ट्यूमर के लक्षण
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भूपेंद्र चौधरी बताते हैं कि मस्तिष्क की कोशिकाओं के असामान्य रूप से बढ़ने पर गांठ बन जाती है। हमारे शरीर में कोशिकाएं लगातार विभाजित होती रहती है। कोशिकाओं के मरने पर उनके स्थान पर नई कोशिकाएं जन्म लेती हैं। इसमें लापरवाही बरतना खरतनाक हो जाताहै। कई बार नई कोशिकाएं तो पैदा होती रहती है, लेकिन पुरानी कोशिकाएं नहीं करती। धीरे-धीरे इन कोशिकाओं की एक गांठ बन जाती है। यही ब्रेन ट्यूमर होता है। इसमें लापरवाही खतरनाक हो जाती है। इसकी सर्जरी करके रोगियों की जान बचाई जा सकती है।
इससे बचने के उपाय
जिला अस्पताल के योग प्रशिक्षक संजीव शर्मा का कहना है कि प्रतिदिन योग और व्यायाम करना चाहिए। प्रतिदिन भरपूर नींद लेनी चाहिए। अपना वजन ना बढ़ने दें। तंबाकू और शराब का सेवन ना करें।
न्यूरो सर्जन डॉ. अमित बिंदल का कहना है कि न्यूरो सर्जरी के क्षेत्र में बहुत विकास हुआ है। आधुनिक तकनीक से ब्रेन ट्यूमर का उपचार किया जा रहा है। तकनीक के बल पर सर्जरी बहुत सुरक्षित हो गई है। इसके बाद मरीज सामान्य जीवन भी जी सकता है।
कुलदीप
