मेरठ (हि.स.)। बेरोजगारी दूर करने में कृषि और कृषि से जुड़े उद्योग युवाओं के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। ऐसा ही एक डेयरी उद्योग बड़े पैमाने पर रोजगार मुहैया करा रहा है। इससे प्रदेश और देश के दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है।
सरकार की नीतियों से दुग्ध उत्पादन में आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों से दुग्ध उत्पादन में दुग्ध उत्पादन में प्रदेश पूरे देश में अव्वल है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की गोवंश संरक्षण नीति के कारण दुग्ध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। 2017-18 में उत्तर प्रदेश में 29 हजार 52 टन दूध का उत्पादन हुआ था, जो 2018-19 में बढ़कर 30 हजार 519 टन तक पहुंच गया। गोवंश पालन और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने गोकुल पुरस्कार और देशी गोवंश की गाय से सर्वाधिक दूध उत्पादक को नंदबाबा पुरस्कार देने शुरू किए है। इसे बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ग्रीनफील्ड डेयरियों की स्थापना करने जा रही है।
प्रदेश भर में बनाए जा रहे गोआश्रय स्थल
प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंश को संरक्षण देने के लिए प्रत्येक जिले के अंतर्गत गोवंश आश्रय स्थल खोले जा रहे हैं। प्रदेश में लगभग साढ़े पांच लाख गोवंशीय पशु संरक्षित किए गए हैं। 66 हजार से अधिक गोवंश को इच्छुक पशुपालकों की सुपुर्दगी में दिया गया है। इसका सीधा असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ रहा है और उसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
युवाओं के लिए बना रोजगार का साधन
युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए प्रदेश सरकार कई योजनाएं चला रही है। इसमें डेयरी उद्योग में असीम संभावनाएं है और बड़ी संख्या में युवा इसे अपना रहे हैं। बागपत जनपद के सैदपुर कलां गांव निवासी वीरेंद्र त्यागी पेशे से कंप्यूटर इंजीनियर है, लेकिन अब गांव में डेयरी उद्योग से जुड़ गए हैं और लाखों रुपए सालाना कमा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार की नीति के अंतर्गत उन्होंने डेयरी उद्योग शुरू किया और अब वह दूसरों की नौकरी करने की बजाय दूसरे लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
मेरठ जनपद के खरखौदा ब्लाॅक स्थित पांची गांव निवासी चेतन कुमार ने भी निजी स्कूल के शिक्षक की नौकरी छोड़कर डेयरी उद्योग शुरू किया और आज पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो गए हैं। इसी तरह से अनेक युवा डेयरी उद्योग से जुड़कर स्वरोजगार अपना रहे हैं।
मेरठ जनपद में बढ़ते जा रहे दुग्ध प्लांट
दूध से अन्य उत्पाद बनाने के लिए दुग्ध प्लांट लगाए जा रहे हैं। इन प्लांट में दूध से बने अन्य उत्पाद दही, छाछ, घी, पनीर आदि का निर्माण किया जा रहा है। इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही पराग, अमूल जैसी कंपनियों के उत्पाद बढ़ते जा रहे हैं।
एक जून को मनाया जाता है विश्व दुग्ध दिवस
एक जून को विश्व दुग्ध दिवस मनाने की शुरूआत 2001 में संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन ने शुरू की। इसका उद्देश्य डेयरी क्षेत्र में स्थिरता लाना, आर्थिक विकास तेज करना, आजीविका बढ़ाना और पोषण के योगदान की महत्ता के प्रति लोगों को जागरूक करना है। प्राकृतिक दूध के सभी पहलुओं के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
शरीर के लिए आवश्यक है दूध
वैज्ञानिकों का कहना है कि दूध जरूरी पोषक तत्वों का प्रमुख स्रोत है। इसमें विटामिन-ए, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, आयोडिन, जिंक, फॉस्फोरस, आयरन, फोल्लेट्स, विटामिन डी, राइबोफ्लेविन, विटामिन-बी 12, प्रोटीन आदि मौजूद है। दूध शरीर को ऊर्जा देने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है।
