छात्राओं के साथ समाजसेवियों ने जगायी जागरूकता की अलख
कानपुर (हि.स.)। एक समय हुआ करता था जब सुबह आंगन पर फुदकती गौरैया का झुंड लोगों को एहसास कराती थी कि सुबह हो गयी। फुदकती गौरैया को देख लोग शुभ मानते थे और आनंदित हो उठते थे, लेकिन विकास की गति में तकनीक के अधाधुंध प्रयोग से गौरैया को वह वातावरण नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में समाज को आगे आना चाहिये और हर घर में घोसला बनाये, जिससे गौरैया का संरक्षण किया जा सके। यह बातें शनिवार को विश्व गौरैया दिवस पर दयानंद गर्ल्स पीजी कालेज के जन्तु विज्ञान की प्रवक्ता डा. कंचन मित्तल ने कही।
दयानंद गर्ल्स पीजी कॉलेज कानपुर के जंतु विज्ञान विभाग द्वारा विश्व गौरैया दिवस पर प्राचार्या डॉ साधना सिंह की अध्यक्षता में छात्रों द्वारा गौरैया दिवस पर अपने—अपने विचार व्यक्त किए गये। प्रवक्ता डा. कंचन मित्तल ने कहा कि वर्तमान दौर में देखा जा रहा है कि गौरैया लगातार कम होती जा रही हैं जो चिंताजनक है। कहा कि कीटनाशक प्रयोग के साथ वातावरण परिवर्तन आदि से पक्षियों की जनसंख्या पर बहुत प्रभाव पड़ा है। यह एक विचारणीय प्रश्न है और हमें इस पर ध्यान देना चाहिए। इसके लिए हमें अपने घरों की छतों पर उनके लिए दाना और पानी उचित स्थानों पर रखकर उन्हें जीवित रखने का अथक प्रयास करना चाहिए। इस कार्यक्रम में छात्राओं ने एक दूसरे के साथ विचार साझा किए, जिससे इन सभी प्राणियों की हमारे जीवन में महत्व तथा प्रभाव के विषय में सभी का ज्ञान वर्धन हुआ। साथ ही छात्राओं ने कॉलेज प्रांगण में पक्षियों के लिए पानी के पात्रों को जगह-जगह स्थापित किया। उनके लिए कृत्रिम घोसले भी जगह-जगह पर लगाए गए। कार्यक्रम के अंत में सभी ने इन जीवों की रक्षा तथा उन्नयन के लिए शपथ ली। इस दौरान डा. अर्चना श्रीवास्तव, डा. रचना प्रकाश, डा. सुनीता आर्या, डा. अमिता, डा. रचना सिंह, डा.इशिता, डा. शालिनी आदि मौजूद रहीं।
समाजसेवी चल रहें अभियान
गौरैया दिवस पर आज तो सभी लोग गौरैया को याद कर रहे हैं, लेकिन दिवस के बाद इस पर कुछ ही लोगों का ध्यान रहता है। इसको देखते हुए शहर के समाजसेवी राजेश यादव ने अभियान चला रखा है और शहर के अलग—अलग जगहों घोसला टांगने के साथ ही उनको रोजाना दाना पानी भी दिया जा रहा है। बताया कि पिछले पांच वर्ष से मैंने घरों में पानी के पात्र व घोसले टांगने का अभियान चला रहा हूं, अभी तक आठ सौ से अधिक स्थानों पर घोसले टांगे गए हैं और पानी के पात्र भी रखे हैं। इनमें से दो सैकड़ा ऐसे घोसले हैं जिनमें चिड़ियों ने अंडे दिए हैं और उनके बच्चे भी हुए हैं। कुछ घोसलों में गिलहरियों ने कब्जा कर अपने बच्चे पैदा किए हैं।गिलहरी भी अत्यंत उपयोगी है जो फल खाने के बाद बीजों को जमीन में खोदकर छुपा देती है और फिर यह सोच कर कि वह इस बीज को फिर खाएगी लेकिन बाद में वह भूल जाती है कि उसने वह भी जमीन में कहां छुपाया था यही बीज बाद में पौधे बनते हैं।
