–सम्पूर्णानंद संस्कृत विवि के 38वें दीक्षान्त समारोह में 29 विद्यार्थियों में 57 स्वर्ण पदक वितरित
-कुमारी मीना को सर्वाधिक 10 पदक मिला
वाराणस (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने विश्वविद्यालयों से शिक्षण कार्य के साथ सामाजिक उत्तर दायित्व भी निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सहयोग करने के साथ विश्वविद्यालय आंगनबाड़ी केन्द्र को प्रोत्साहित करें और एक गांव को भी गोद ले।राज्यपाल मंगलवार को सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षान्त समारोह की अध्यक्षता कर विद्यार्थियों और शिक्षकों को सम्बोधित कर रही थी। दीक्षान्त समारोह में मुख्य अतिथि मालदीव में भारत के पूर्व राजदूत और विदेश मंत्रालय में अपर सचिव (विकास और साझेदारी प्रशासन) अखिलेश मिश्र के साथ राज्यपाल ने पद्मश्री से सम्मानित संस्कृत के प्रकांड विद्वान प्रो.रामयत्न शुक्ल को महामहोपाध्याय की उपाधि से अलंकृत किया । कुल 29 छात्र-छात्राओं के बीच 57 पदक वितरित करने के बाद उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील किया कि ऐसे छात्र जो अपनी उपाधियां नही ले गये है। उनकी उपाधियों को उनके घरों तक डाक से भेजा जाय। भले ही छात्र दीक्षांत समारोह में उपस्थित हैं या नहीं। उसकी उपाधि घर भेजी जाय। राज्यपाल ने कहा कि पिछले तीन साल की ऐसी उपाधियां छात्रों को उनके पते पर डाक से भेज राजभवन को सूचना दी जाय। राज्यपाल ने संस्कृत भाषा की जमकर सराहना के बाद बाद कहा कि संस्कृत भाषा नही भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। संस्कृत भाषा और सनातन संस्कृति की वजह से ही कश्मीर से कन्याकुमारी, कामरूप से कच्छ तक भारत एकता के सूत्र में बंधा है। उन्होंने कहा कि देश में स्वतंत्रता के बाद संस्कृत भाषा की ओर ध्यान नही दिया गया। इसके विकास का सार्थक प्रयास नही किया गया। सुखद स्थिति है कि नई शिक्षा नीति में संस्कृत भाषा के ज्ञान विज्ञान को भारतीय शिक्षा के मूल पर जोर दिया गया है। नई शिक्षा नीति से संस्कृत की प्रासंगिकता को नई दिशा मिेलगी। संस्कृत के विद्यान भी इस भाषा के गूढ़ रहस्य को सरल भाषा में जन सामान्य तक पहुंचाये। विश्वविद्यालयोें में शैक्षणिक वातावरण हो साथ ही चुनौतियों के समाधान के लिए भी कार्य करे। समारोह में बतौर मुख्य अतिथि मालदीव में भारत के पूर्व राजदूत अखिलेश मिश्र ने कहा कि संस्कृत के छात्रों को उसी प्रकार गर्व करना चाहिए जैसे एम्स और एमबीए का छात्र महसूस करते है। संस्कृत का भारतीय संस्कृति से अटूट संबंध है। यह विश्व कल्याण की भाषा है। संस्कृत उदात्त और लोकतांत्रिक मूल्यों से प्रेरित करता है। उन्होंने कहा कि परस्पर विरोधियों में सामंजस्य स्थापित करने का गुण भी संस्कृत में है। संस्कृत की वजह से ही भारत विविधता वाला देश बन पाया है। इसके पहले समारोह की शुरूआत शैक्षणिक शिष्टयात्रा, राष्ट्रगान, दीप प्रज्जवन और कुलगीत से हुई। समारोह में आचार्य कक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली मीना कुमारी को सर्वाधिक 10 स्वर्ण पदक, सुमित्रा नंदन चतुर्वेदी एवं आशुतोष कुमार को 05,भुनेश्वर चैतन्य को 04, छविरमण भट्टराइ,शुभम पांडेय,सूर्यसेन पांडेय को पांच—पांच स्वर्ण पदक मिले। समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों की 17244 उपाधियां जारी की गई। इसमें स्नातक की 11177 और स्नातकोत्तर की 4647 उपाधियां हैं। समारोह में स्पेन की मारिया को भी स्वर्ण पदक मिला। मारिया ने पूर्व मीमांसा विषय में विश्वविद्यालय में टॉप भी किया। दीक्षान्त समारोह में स्वागत भाषण कुलपति प्रो.राजाराम शुक्ल ने किया।
