Wednesday, March 4, 2026
Homeउत्तर प्रदेशविभाजन का दंश झेलने के बाद भारत में खड़ा किया खेल कारोबार

विभाजन का दंश झेलने के बाद भारत में खड़ा किया खेल कारोबार

मेरठ (हि.स.)। विभाजन की त्रासदी झेलकर पाकिस्तान में अपना सब कुछ गंवाकर लाखों लोग भारत आए। अपनी जन्मभूमि से बिछड़ने के बाद इन लोगों ने संघर्ष, मेहनत और अपनी जीवटता से भारत में एक मुकाम हासिल किया।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोदा में अपनी जमीन-जायदाद छोड़कर भारत आये हरनाम दास ने आजीविका के लिए चाय बेची और साइकिल में पंचर तक लगाया। आज इनके परिजनों ने मेरठ में खेल का बड़ा कारोबार स्थापित कर दिया है।

मेरठ के कॉक्सटोंस स्पोर्ट्स इक्विपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विनीत डावर की आंखें आज भी विभाजन की विभीषिका से उपजे अपने संघर्ष के दिनों को याद करके डबडबा जाती हैं। उनके दादा हरनाम दास पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोदा में रहते थे। विनीत बताते हैं कि सरगोदा में उनकी काफी जमीन-जायदाद थी। विभाजन के बाद उनके दादा को अपना घर-बार छोड़कर भागना पड़ा।

चाय बेचने और पंचर लगाने का काम किया

अंबाला में आजीविका चलाने के लिए उन्होंने रेलवे स्टेशन पर चाय बेची और साइकिल में पंचर लगाने का काम किया। 1948 में अंबाला से मेरठ के दौराला गांव में आ गए। अपनी मेहनत के बल पर उन्होंने अपने पूरे परिवार का पालन-पोषण किया। हरनाम दास के परिवार में पांच पुत्रियों और एक पुत्र का जन्म हुआ। सीमित संसाधनों में भी उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर पूरा ध्यान दिया।

विदेशों में खेल उपकरण निर्यात करती है कंपनी

दौराला में उनके दादा ने तेल की दुकान खोली। थोड़े समय बाद ही हरनाम दास का निधन हो गया तो परिवार की जिम्मेदारी कम उम्र में उनके बेटे सुभाष चंद डावर के कंधों पर आ गई। उनका तेल का काम अच्छा चलने लगा। तेल में पैसे का नकद लेनदेन होने के कारण उस समय लूटपाट की घटनाएं होती थीं तो सुभाष चंद्र दौराला से मेरठ आ गए। इसके बाद उन्होंने स्पेयर पार्ट्स के काम में हाथ आजमाया। देखते ही देखते वे स्कूटर, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर के स्पेयर पार्ट्स भी बनाने लगे। उनके तीन बेटे विनीत डावर, पुनीत डावर और नवीन डावर ने कामकाज संभाल लिया। 2009 में विनीत के पिता की मौत हो गई। तीनों भाइयों ने मिलकर खेल का सामान बनाने की फर्म स्थापित की। आज यह कंपनी अपने खेल उपकरणों का विदेशों में निर्यात करती है। आज तीनों भाई मिलकर इस फर्म को चलाते हैं और संयुक्त परिवार में रहकर एक आदर्श स्थापित कर रहे हैं। पश्चिम उप्र में इनकी खेल कंपनी की एक अलग साख है। आज भी उत्तर भारत में पाकिस्तान से आने वाले लाखों लोग हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और कर्मठता के दम पर बड़े कारोबार स्थापित किए हैं।

कुलदीप/दधिबल

RELATED ARTICLES

Most Popular