स्कूटर पर सवार हो हाईकोर्ट में बहस करने लगे थे वकील
प्रयागराज (हि.स.)। देशव्यापी कोरोना महामारी ने न केवल लोगों के जीवन शैली को प्रभावित किया, अपितु लोगों के काम करने का तरीका भी बदल दिया। चाहे देश की न्यायपालिका रही हो अथवा शिक्षा का क्षेत्र या अन्य कोई भी कार्य क्षेत्र, इस महामारी ने सबको कार्य करने का एक नया तरीका अपनाने को मजबूर कर दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक अधिवक्ता के अमर्यादित कृत्य की वजह से एक वादकारी को न्याय से वंचित होना पड़ा और उसके केस की सुनवाई कोर्ट ने टाल दी।
कोरोना के कारण अदालतों में वर्चुअल सुनवाई होने लगी, बच्चे ऑनलाइन क्लास करने लगे। लोग सर्विस भी ऑनलाइन करने लगे। परन्तु इन सबके बावजूद इस नये काम करने के तरीके ने लोगों को मर्यादा, अनुशासन व सभ्यता के साथ अपना कर्तव्य करते रहने की भी शिक्षा दी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस समय मुकदमों की सुनवाई वर्चुअल तरीके से चल रही है। वकीलों को लिंक स्लाट उसके केस की सुनवाई से पूर्व हाईकोर्ट से भेज दिया जाता है और वकील उस लिंक के माध्यम से कोर्ट के सामने रूबरू होकर बहस करता है।
कोर्ट ने एक मामले में जब अधिवक्ता को देखा कि वह स्कूटर पर सवार हो केस की बहस कर रहे हैं तो जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता व जस्टिस एसएएच रिजवी की अदालत ने वकील के इस कृत्य को अमर्यादित कोर्ट की गरिमा के खिलाफ माना। अप्रसन्न अदालत ने अधिवक्ता को ऐसा अमर्यादित कृत्य भविष्य में न करने की नसीहत दी और केस की सुनवाई 12 जुलाई तक के लिए टाल दिया। वकील की इस गलती का अंततः वादकारी को खामियाजा भुगतना पड़ा और उसके केस की सुनवाई नहीं हो सकी।
हाईकोर्ट में समय से लिंक नही मिलने व टाइम स्लॉट न भेजने के कारण असमंजस की स्थिति भी बनी रहती है। जिससे वकीलों को शाम तक लिंक का इंतजार करना पडता है। 25 जून को इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक ऐसी घटना हुई कि कोर्ट ने उसे देखकर केस की सुनवाई से ही इन्कार कर दिया और केस की अगली डेट लगा दी। हाईकोर्ट में खुशबू के नाम से केस लगा था। वकील साहब को उस केस का लिंक भी मिला था और वह कोर्ट से अपने को कनेक्ट भी कर लिए।
कोर्ट अधिवक्ता के कृत्य से इस कारण नाराज हुई कि जब सुनवाई का वीडियो लिंक अधिवक्ता को दिया गया तो उस समय वह स्कूटर से कहीं जा रहे थे और स्कूटर पर ही लिंक जोड़कर बहस शुरू कर दी। जिस पर कोर्ट नाराज हुई और केस सुनने से ही इंकार कर दिया और कहा कि भविष्य में वह सावधानी बरते।
विधि एवं न्याय : एक अधिवक्ता के अमर्यादित कृत्य से वादकारी को न्याय से वंचित होना पड़ा
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