Wednesday, February 11, 2026
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विंध्यधाम की दुर्व्यवस्था से नाराज श्रद्धालुओं को विंध्य काॅरिडोर से उम्मीद

– निकास द्वार से पुलिस तो दानपात्र के पीछे से पंडा कराते हैं दर्शन

मीरजापुर(हि.स.)। आस्था पर चोट करती व्यवस्था… व नियमों की अनदेखी…। शायद ही ऐसा कोई श्रद्धालु होगा जो विंध्यधाम की दुर्व्यवस्था से अनजान होगा। मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने विंध्यधाम पहुंचने वाले श्रद्धालु यहां की व्यवस्था से निराश होकर ही लौटते हैं। ऐसा इसलिए कि विंध्यवासिनी मंदिर पर कोई नियम व व्यवस्था नहीं है। इतना ही नहीं, नियम बनाने वाले व पालन कराने वाले ही नियम की अनदेखी करते हैं। विंध्यवासिनी मंदिर पर तैनात पुलिसकर्मी निकास द्वार से तो पंडा दानपात्र के पीछे से दर्शन कराते हैं, जो नियम के खिलाफ है।

…आखिर विंध्यधाम की व्यवस्था कब सुधरेगी यह कहना मुश्किल है, लेकिन इस पर गंभीरतापूर्वक ध्यान देने की जरूरत है। निकास द्वार से प्रवेश, छीना-झपटी, चोरी, मारपीट, अवैध वसूली समेत कई ऐसे मामले हैं, जिसके कारण आएदिन विवाद होता है। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता साफ झलकती है। श्रीविंध्य पंडा समाज, मंदिर व्यवस्थापिका समिति व प्रशासन को ताल-मेल बनाना होगा, तभी ऐसे गंभीर समस्या से निजात मिलेगी। अगर कोशिश की जाए तो जरुर सफलता मिलेगी। विंध्यधाम की दुर्व्यवस्था से नाराज श्रद्धालुओं को विंध्य कारिडोर से काफी उम्मीद है। विंध्य कारिडोर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट होने के नाते हर किसी की निगाहें इस पर टिकी है।

श्रद्धालुओं का मानना है कि काॅरिडोर निर्माण के साथ व्यवस्थाओं का भी विस्तार किया जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो दुर्व्यवस्थाओं से निजात मिलेगा ही, मां विंध्यवासिनी का दर्शन करने में भी सुगमता होगी। यही कारण है कि मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बहाने श्रद्धालु विंध्य कारिडोर झलक देखने जरूर आते हैं। अब तो श्रद्धालुओं की आमद भी बढ़ गई है। इससे दुकानदार काफी खुश हैं। सोमवार को भी विंध्यधाम में श्रद्धालुओं की भीड़ दिखी। हर कोई मां विंध्यवासिनी का दीदार करने को बेताब था। कोई झांकी से तो कोई गर्भगृह से मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन किया। इसके बाद मंदिर परिसर पर विराजमान समस्त देवी-देवताओं काे नमन कर मंगलकामना की। अब विंध्याचल आने वाले श्रद्धालु दर्शन-पूजन के बाद भ्रमण करना नहीं भूलते। तंग गलियां भी गायब हो चुकी हैं। विंध्य कारिडोर बन जाए तो अच्छा होगा यह हर श्रद्धालुओं की जुबां पर सुनने को मिलेगा।

कमलेश्वर शरण

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