-बारातियों से भरी पिकप अनियंत्रित होकर पलट गई थी
वाराणसी (हि.स.)। कपसेठी पूरेनंदापुर गांव से सोनभद्र जिले में गई बारात हादसे में पांचवी मौत से परिजनों के साथ गांव के लोग भी शोकाकुल हैं। हादसे में गंभीर रूप से घायल पूरेनंदापुर गांव के ही प्रदीप कुमार राजभर की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। सूचना पर रविवार को नाते रिश्तेदारों के साथ गांव के लोग भी मृत प्रदीप के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचते रहे। परिजनों और पछाड़ें मारकर रोती महिलाओं और बच्चों के बिलख-बिलखकर रोने से लोगों की आंखे भी गीली हो गई। हादसे में गंभीर रूप से घायल चार लोगों की मौत उसी दिन ही हो गई थी। दुर्घटना में घायल नौ लोगों का इलाज चल रहा है।
पूरेनंदापुर गांव के निवासी रामाश्रय शर्मा के बेटे धीरज शर्मा की बरात बीते शुक्रवार को सोनभद्र जिले के कुसी डौर गांव गई थी। बारात में एक पिकअप पर सवार होकर 14 लोग भी सोनभद्र कुर्सी डौर गांव के लिए निकले। पिकप गांव के नजदीक पहुंची ही थी कि एक बाइक को टक्कर लग गई। बाइक सवार को घायल होकर गिरते देख चालक ने पिकअप की रफ्तार बढ़ाई और वह अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में पिकअप सवार घायल हो गये। सूचना पर वर-वधु पक्ष के लोग सभी घायलों को लेकर राबर्ट्सगंज स्थित जिला अस्पताल पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने मेहंदीगंज निवासी शशि शर्मा (26) और पूरेनंदा (बेलवां) गांव के विनय राजभर (35) को मृत घोषित कर दिया। इसके साथ घायल 12 लोगों को वाराणसी रेफर किया गया। वाराणसी लाते समय घायल बराती अरुण राजभर (19 वर्ष) और आर्यन राजभर (13 वर्ष) की भी मौत हो गई। शनिवार को परिजन शवों के अन्तिम संस्कार की तैयारी में जुटे थे, इसी दौरान पूरेनंदापुर गांव के ही प्रदीप कुमार राजभर की अस्पताल में मौत की सूचना पर लोग स्तब्ध रह गये। परिजनों के करुण क्रंदन से सभी की आंखें नम हो गईं। पोस्टमार्टम के बाद प्रदीप का शव गांव पहुंचा तो कोहराम मच गया।
कछवां स्थित बरैनी घाट श्मशान पर विनय राजभर, अरुण राजभर, आर्यन राजभर और प्रदीप राजभर के पार्थिव शरीर का अन्तिम संस्कार किया गया। एक साथ चार शवों के पार्थिव शरीर को जलते देख परिजनों के करुण क्रंदन से वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। हादसे में मृत शशि शर्मा का शव उसके पैतृक गांव मेहदीगंज पहुंचा तो परिजन बिलखने लगे। चार भाई और छह बहनों में सबसे छोटा शशि अविवाहित था। शनिवार को अदलपुरा स्थित गंगा घाट पर शशि के शव को बुजुर्ग पिता ने मुखाग्नि दी तो मौजूद ग्रामीणों की भी आंखें डबडबा उठीं। सड़क हादसे में जान गंवाने वाले अरुण और आर्यन सगे भाई थे। ग्रामीणों के अनुसार उनकी दो बहनें भी थीं। उनकी एक बहन की मौत बीते साल पांच फरवरी को हुई थी। अब सिर्फ एक बहन ही बची है। अरुण और आर्यन के पिता मुंबई में काम करते हैं। दोनों बेटों की मौत की सूचना पाकर वह मुंबई से घर के लिए रवाना हो गए हैं। आर्यन और अरुण के साथ ही उनके चाचा विनय राजभर को मुखाग्नि दादा राजबली राजभर ने दी। घर में तीन मौतों से बृद्ध राजबली राजभर का हाल बेहाल है।
श्रीधर
