सिर पर गठरी लिए वृद्ध और अधेड़ महिलाएं मणिकर्णिकाघाट पर संकल्प छुड़ाने पहुंच रही
वाराणसी, 18 दिसम्बर (हि.स.)। अगहन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर शनिवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी में ठंड और सर्द हवाओं के बीच धार्मिक अतरगृही यात्रा पर श्रद्धालु नर-नारी और बच्चे निकल पड़े। सर्द हवाओं के बीच श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद मोक्ष तीर्थ मणिकर्णिकाघाट पर संकल्प लेकर नंगे पाव अतरगृही यात्रा की शुरूआत की। काशी की पहचान धार्मिक यात्रा में निकले श्रद्धालु कंपकपाती ठंड के बीच हर-हर महादेव, काशी विश्वनाथ शंभों के जयघोष के साथ सर पर गठरी रख काशी की परिक्रमा कर रहे हैं।
यात्रा की शुरूआत मोक्ष तीर्थ मणिकर्णिका घाट से संकल्प लेकर होती है। अतरगृही यात्री मणिकर्णिका घाट से नाव द्वारा अस्सी घाट पहुंचते हैं। घाट से पैदल चलकर जगन्नाथ मंदिर, रामानुज कोट, श्री संकटमोचन, साकेत नगर कॉलोनी, खोजवा, लहरतारा, मडुंवाडीह, कैंटोनमेंट, वरुणा पुल होते हुए यात्री पुन: मणिकर्णिकाघाट पहुंच कर संकल्प छुड़ाकर यात्रा को विराम देते हैं।
शिवाराधना समिति के डॉ मृदुल मिश्र बताते है कि अतरगृही यात्रा काशी की पहचान है। धार्मिक लोगों के चलते ही काशी की पहचान बची हुई है। काशी की प्राचीन परम्परा में अगहन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को काशी के अंदर परिक्रमा यात्रा निकलती है । जिसको अंतरगृही यात्रा कहते हैं। समाजसेवी रामयश मिश्र बताते है अंतरगृही यात्रा में काशी के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं और पुरुष नंगे पांव काशी के अंदर-अंदर पैदल परिक्रमा करते हैं। पंचांग के अनुसार आज ही पूर्णिमा लग जाने के कारण यह यात्रा भोर में 4 बजे से ही शुरू हो गई। बताते चले,वाराणसी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश की योगी सरकार भी गंभीर है। काशी की तीन अन्तर गृही यात्राओं को सुविधाजनक बनाने के लिए पर्यटन विभाग लगातार कार्य कर रहा है।
श्रीधर
