-भव्य पूजा पंडालों में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा कर आराधना
वाराणसी (हि.स.)। माघ माह की शुक्ल पंचमी (वसंत पंचमी) पर्व पर शनिवार को काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ की नगरी ज्ञान, विद्या, वाणी, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की आराधाना में लीन है। पर्व पर पूजा पण्डालों, स्कूलों-महाविद्यालयों, नगर के तीनों विश्वविद्यालयों के छात्रावासों में पूर्वाह्न से ही विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विद्यान कर्मकांडी ब्राह्मणों और बटुकों ने मां वाग्देवी की प्रतिमा को स्थापित कर उसमें प्राण प्रतिष्ठा की और हवन पूजन किया।
इस दौरान युवा माता की आराधना में तल्लीन रहे। दोपहर बाद पूजा पण्डालों का पट आम जन के लिए खोल दिया गया। फिर वीणावादिनी के नयनाभिराम मूर्तियों के दर्शन के लिए युवाओं और क्षेत्रीय महिलाओं की भीड़ पंडालों में उमड़ती रही। नदेसर स्थित भारतीय स्पोर्टिग क्लब के पूजा पंडाल की भव्यता, झालर-झूमर और लाइटिंग लोगों में आकर्षण का केन्द्र रही। पर्व पर जिले भर में तीन सौ से अधिक पंडालों में प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।
पर्व पर लोगों में वसन्त उत्सव की खुमारी भी छायी रही। उत्साही युवकों की टोली ने मस्ती और उल्लास के बीच परम्परानुसार होलिका की नींव प्रमुख चौराहों, गलियों, और गांव के सार्वजनिक स्थानों पर रखी। युवाओं ने रेड़ के वृक्ष और उसकी डालिया काटकर चौराहों पर रख होलिका का नींव रखा। इस दौरान कई जगहों पर युवा नगाड़े की थाप पर थिरकते रहे।
श्रीधर
