Monday, February 9, 2026
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वाराणसी में गंगा खतरे के निशान के ऊपर पहुंची, टापू बने तटवर्ती इलाके और ढ़ाब क्षेत्र के गांव

– वरूणा भी रौद्र रूप में ,निचले इलाकों के मकानों में भरा पानी, बुनकरों के करघे पानी में डूबे

वाराणसी(हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। लहरें खतरे के निशान 71.262 मीटर के ऊपर पहुंच गई है। लोगों को 1978 के बाढ़ की याद आ रही है। तब गंगा की लहरें 73.901 मीटर पर पहुंच गई थी। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार सुबह गंगा का जलस्तर 71.50 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर ज्यादा है।

लगभग एक सेमी प्रतिघंटा की दर से गंगा में बढ़ाव जारी है। गंगा की लहरें तटवर्ती क्षेत्र के बस्तियों और कालोनियों में घरों में पहुच गई है। सड़कें और सम्पर्क मार्ग के उपर घुटने भर से अधिक पानी भर गया हैं। सीवर भी ओवरफ्लो हो गया है। गंगा और वरुणा नदी के तटवर्ती दर्जनों मोहल्लों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। तटवर्ती गांवों खास कर ढ़ाब क्षेत्र में में हालत बिगड़ रहे हैं। सीवर लाइन ओवरफ्लों के चलते बीएचयू ट्रामा सेंटर परिसर में भी बाढ़ का पानी भरने लगा है। वरुणा किनारे के एक दर्जन से अधिक मोहल्लों, ग्रामीण क्षेत्रों में हालत बिगड़ते जा रहे हैं। बाढ़ के चलते तटवर्ती क्षेत्र के स्कूलों में पठन-पाठन बाधित हो गया है।

गंगा में लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण सामने घाट क्षेत्र की कॉलोनियों से लोग परिवार को सुरक्षित स्थानों पर भेज रहे है। जिला प्रशासन भी इस कार्य में मदद कर रहा है। एनडीआरएफ और पुलिस टीमों ने राहत सामग्रियों के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है। उधर, वरुणा नदी में उफान के चलते पुरानापुल से बघवा नाला तक पांच हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हो गए हैं। सबसे ज्यादा परेशानी नदी किनारे रहने वाले बुनकर परिवारों की हैं। घरों में पानी भरने से लूम बंद हो गए हैं। दानियालपुर, पुल कोहना, शैलपुत्री, नई बस्ती, सिधवा घाट, बघवा नाला के निचले इलाकों से होता हुआ पानी ऊपर आबादी की ओर बढ़ चला है। प्रभावित क्षेत्रों के लोग कहीं टेंट लगाकर तो कहीं किसी परिचित के यहां रह रहे हैं।

वाराणसी में शहर से लेकर गांवों तक अब तक बाढ़ से लगभग 2 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। शवदाह के लिए आने वाले लोगों की परेशानी बढ़ रही है। मणिकर्णिका घाट की गली में घुटने भर से ज्यादा पानी भरा हुआ है। लोग नाव लेकर ऊंचे प्लेटफॉर्म तक शवदाह के लिए पहुंच रहे हैं। हरिश्चंद्र घाट के समीप गलियों में शवदाह का काम हो रहा है।

गंगा घाटों के किनारे स्थित मणिकर्णिका, अस्सी और दशाश्वमेध, अस्सी सहित तटवर्ती इलाकों के अन्य मुहल्लों की गलियों में नाव चल रही है। नगवां और सामने घाट क्षेत्र के दर्जन भर से ज्यादा मुहल्लों में भी आवागमन का साधन नाव है।

वाराणसी पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने तटवर्ती क्षेत्र के सभी थानेदारों को निर्देश दिया है कि जिन इलाकों के लोग अपने घर छोड़ कर राहत शिविरों में रह रहे है। वहां पुलिस मोटरबोट से पेट्रोलिंग बढ़ाए। बंद घरों में चोरी की शिकायत नहीं आनी चाहिए। जिन नागरिकों को पुलिस की मदद चाहिए वह 112 नंबर या फिर अपने नजदीकी थाने के थानेदार के सीयूजी पर कॉल करें। थानेदार हर कॉल को अटेंड करेंगे और कोई मदद मांगेगा तो तत्काल एनडीआरएफ की टीम लेकर पहुंचेंगे।

श्रीधर

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