Friday, March 20, 2026
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वाराणसी में असि नदी के किनारे मठ-मन्दिर भी सरंक्षित हो : स्वामी नारायणानंद तीर्थ

वाराणसी (हि.स.)। काशी धर्म पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ ने असि नदी के उद्धार के लिए किए जा रहे कार्यों की जमकर सराहना की है। उन्होंने प्रदेश सरकार के कदम को स्वागत योग्य बता असि नदी के किनारे स्थित मंदिरों एवं मठों को भी सरंक्षित करने की मांग वाराणसी के सांसद, देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है।

शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ ने रविवार को कहा कि जिस तरह से गंगा नदी के किनारे धर्म और संस्कृति का उद्भव हुआ है। ठीक उसी तरह से असि नदी के किनारे भी संत और महंत धुनि लगाते हैं। नदी किनारे स्थित मठों एवं मंदिरों में भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का प्रचार-प्रसार भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि असि नदी के किनारे स्थित मठों में चारों वेदों की तत्तद शाखाओं का पठन-पाठन, वेद भाष्य ग्रंथों का अनुशीलन वेदच्छात्र अनादि काल से करते आ रहे हैं। काशी की स्थापना के साथ ही मठों में भारतीय संस्कृति, वेद, उपनिषद का बटुकों को अध्ययन अध्यापन कराया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से असि नदी को बचाने की पहल की जा रही है। उसी तरह से मठ मंदिरों को भी सरंक्षित करने की अत्यंत आवश्यकता है। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस सनातन विरासत को बचाने के लिए तत्काल विचार विमर्श करे। संत ने कहा कि मठ मंदिर ही काशी की पहचान हैं। यहीं से भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता धर्म का ध्वज पताका लहराने का कार्य सदियों से होता आ रहा है। शंकराचार्य के उत्तराधिकारी शिष्य स्वामी लखन स्वरूप ब्रह्मचारी ने कहा कि असि नदी को बचाने में श्री काशी धर्मपीठ रामेश्वर मठ शुरू से ही लगा रहा है और आगे भी पूरी तरह से सहयोग करेगा।

उन्होंने कहा कि असि नदी के किनारे स्थित मठों के धर्माचार्यों द्वारा संस्कार संस्कृति एवं मूल्यों के जतन के लिए निरन्तर अक्षुण्ण भीष्म प्रयास होता आ रहा है। जनकल्याण के लिए धर्मज्ञ सतत धर्म चेतना यात्रा में सन्नद्ध होकर आध्यात्मिक सत्संग, प्रवचन, यज्ञादि करते आ रहे हैं। इसलिए ऐसे धर्मपीठों, मठों को बचाने की भी सुध प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के साथ जिला प्रशासन को लेनी चाहिए।

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