Wednesday, February 11, 2026
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वाराणसी में अंतिम यात्रा के लिए किराये से मिल रहे कंधे, 4000 रुपये तक का शुल्क


वाराणसी । धर्मनगरी वाराणसी में दाह संस्कार की अंतिम यात्रा के लिए किराए के कंधे मिल रहे हैं। कोरोना वायरस के खौंफ के चलते अपने स्वजन, परिजन और रिश्तेदार अर्थी उठाने को तैयार नहीं है। ऐसे में घाट पर कुछ लोग किराए के कंधे से लेकर अंतिम संस्कार तक का पैसा पैकेज के रूप में बताने लगे हैं। इसकी शिकायत इसलिए सुर्ख़ियां नहीं बनती, क्योंकि देने वाला अपनी मर्ज़ी से दे रहा है। प्रशासन ने निशुल्क व्यवस्था की है लेकिन कंधे कहां से लाएं? सड़क से गंगा घाट तक सीढ़ियों की संख्या महज 12 से 15 हैं। लेकिन उन सीढ़ियों को पार करके गंगा किनारे चिता तक ले जाने के कंधों का किराया या शुल्क तीन 3000 से 4000 रुपए तक है।
काशी विद्युत परिषद के महामंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी ने बताया कि ऐसे काल की कल्पना उन्होंने कभी नहीं की थी। पितरों को और स्वजनों को कंधा देना पुण्य भी है और फ़र्ज़ भी। शास्त्रों पुराणों में इस पुण्य का अलग अलग तरीके से वर्णन भी है लेकिन लोग मजबूरी में किराए की कंधा ले रहे हैं। हरीशचंद्र घाट के पास रहने वाले पप्पू गौड़ कहते हैं कि उन्होंने कभी ना तो खुद ऐसा नजारा देखा और ना ही कभी अपने बुजुर्गों से ऐसा सुना कि किसी इंसान को मरने के बाद उसके परिजनों के चार कंधे भी नसीब ना हो। लेकिन फिलहाल कोरोना के दूसरी लहर में ऐसी तस्वीरें भी काशी में देखने को मिल रही हैं, जो चौंकाती हैं। भले ही कुछ नौजवान और घाट में अन्य लोग किराए का कंधा देने के लिए पैसे लेते  हों लेकिन कबीर की काशी में अमन कबीर जैसे कुछ ऐसे भी नौजवान हैं, जो सेवा भाव से इन शवों का अंतिम संस्कार करते हैं।

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