-कुंड में माता रानी के अष्टधातु की प्रतिमा दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु, वर्ष में एक दिन मिलता है दर्शन
वाराणसी(हि.स.)। अक्षय तृतीया के एक दिन बाद सोमवार को काशी में परम्परानुसार मणिकर्णिकाघाट स्थित चक्र पुष्करणी कुंड में हजारों महिलाओं ने अक्षय फल और चारों धामों के पुण्य का लाभ लेने के लिए आस्था की डुबकी लगाई। और मणिकर्णिका मां की अष्ट धातु की प्रतिमा का विधिवत दर्शन पूजन किया
कुंड पर स्नान करने आये श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा का व्यापक प्रबंध किया गया था। दशाश्वमेध एसीपी अवधेश पांडेय ने खुद सुरक्षा व्यवस्था का मोर्चा संभाला। इसके पहले अक्षय तृतीया पर रविवार शाम मणिकर्णी माता की सवारी ब्रह्मनाल स्थित नकुल सरदार व तीर्थ पुरोहित जयेंद्रनाथ दुबे बब्बू महाराज के आवास से निकली। रात में मणिकर्णी माई की अष्टधातु वाली ढाई फीट ऊंची प्रतिमा तीर्थ कुंड में स्थित 10 फीट ऊंचे पीतल के आसन पर स्थापित की गई। देवी की फूलों व नए वस्त्रों से झांकी सजाई गई। प्रतिमा स्थापना के बाद विधि-विधान से मां मणिकर्णी का पूजन अनुष्ठान किया और रात्रि जागरण भी हुआ। इसके बाद आज सोमवार दोपहर में मातारानी की अष्टधातु प्रतिमा को कुंड के जल से स्पर्श कराया गया।
जन विश्वास है कि मणिकर्णिका मां के स्नान से तीर्थ कुंड का जल अगले एक वर्ष के लिए सिद्ध हो जाता है और इसी जल में स्नान करने से श्रद्धालुओं के सभी पाप दूर होते हैं। प्रतिमा को कुंड का जल स्पर्श कराने के बाद कुंड में श्रद्धालुओं के स्नान का सिलसिला शुरू हो गया।
काशीपुराधिपति की नगरी में मान्यता है कि भगवान शंकर ने काशी नगरी बसाने के बाद देवी पार्वती के स्नान के लिए इस कुंड को अपने सुदर्शन चक्र से स्थापित किया था। स्नान के दौरान मां पार्वती का कर्ण कुंडल कुंड में गिरने से नाम मणिकर्णिका पड़ा।
मान्यता है कि मणिकर्णी माई की अष्टधातु की प्रतिमा प्राचीन समय में इसी कुंड से निकली थी। इसीलिए यहां पर अक्षय तृतीय पर स्नान का अधिक महत्व है। एक और मान्यता है कि मां गंगा के अवतरण के पूर्व से ही मणिकर्णिका कुण्ड है। इस कुंड में वर्ष में सिर्फ एक बार मां मणिकर्णिका की अष्टधातु की प्रतिमा श्रृंगारित दर्शन अक्षय तृतीया को ही मिलता है। सैकड़ों वर्ष पूर्व इस तीर्थ पुरोहित परिवार को इसी कुण्ड से मां मणिकर्णिका की प्रतिमा मिली थी। तब से पुराहित परिवार की आठ पीढ़ियां कुण्ड पर वर्ष में केवल अक्षय तृतीया पर ही मां मणिकर्णिका का श्रृंगार और पूजन की परम्परा को निभा रही है।
श्रीधर/राजेश तिवारी
