वाराणसी (हि.स.)। निर्जला एकादशी पर सोमवार को सामाजिक संस्था सुप्रभातम एवं काशी मोक्ष दायिनी सेवा समिति के बैनर तले कलश यात्रा निकाल कर 51 लीटर दूध से काशीपुराधिपति बाबा विश्वनाथ का दुग्धाभिषेक किया गया। कलश यात्रा में श्रद्धालुओं के साथ टोली शंख ध्वनि और डमरू-दल भी शामिल रहा।
इस बार निर्जला एकादशी पर बाबा विश्वनाथ का अभिषेक गंगाजल की जगह दूध से किया गया। वजह रहा गंगाजल का रंग हरा होने और दशाश्वमेध घाट पर शाही नाले का मलजल गिराए जाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ना। गंगाजल को आचमन योग्य न मान श्रीकाशी विश्वनाथ कलश यात्रा पूजा समिति ने दुग्धाभिषेक का निर्णय लिया।
इसके पहले सुबह दोनों संस्थाओं के पदाधिकारी और श्रद्धालु महिलाएं राजेन्द्र प्रसाद घाट पर जुटी। घाट पर 25 कलश में दूध, टिहरी का जल, बेलपत्र डालकर कलश यात्रा निकली। इस दौरान गंगा तट हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष से गूंज उठा। सिर पर कलश उठाए श्रद्धालु महिलाओं के साथ आगे-आगे चल रहे शहनाई वादक और डमरू-दल आकर्षण का केन्द्र रहे। कलश यात्रा दशाश्वमेध, गोदौलिया होते हुए बांसफाटक पहुंची तो वहां दीन दयाल ट्रस्ट के निधिदेव अग्रवाल और व्यापारी नेता बदरूद्दीन के नेतृत्व में मुस्लिम बंधुओं ने कलश यात्रा का स्वागत किया।
कलश यात्रा ज्ञानवापी होते हुए मंदिर प्रशासन के अनुमति से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में पहुंची। गर्भगृह में सवर्ममंगल की कामना करते हुए श्री काशी विश्वनाथ को टिहरी का जल, 51 लीटर दूध अर्पित किया गया।
यात्रा में जगदम्बा तुलस्यान, दीपक बजाज, मोतीचंद अग्रवाल सपत्नी, उमाशंकर अग्रवाल, केशव जालान, मुकुंद लाल टंडन, पवन चौधरी आदि शामिल रहे। उधर,सनातन धर्मियों ने निराजल व्रत रख स्नान-दान के बाद श्रीहरि का पूजन अर्चन किया। सनातन धर्म में मान्यता है कि बिना जल ग्रहण किए गंगा या पवित्र नदियों में पुण्य की डुबकी लगाने और श्रीहरि के पूजन से पूरे वर्ष परिवार पर किसी तरह का संकट नहीं आता है।
