Saturday, February 14, 2026
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वाराणसी : गंगा का रौद्र रूप नहीं हुआ शांत, खतरे के निशान से ऊपर बह रहीं

वाराणसी (हि.स.)। काशी पुराधिपति बाबा विश्वनाथ की प्रेयसी जीवनदायिनी गंगा का रौद्र रूप अब कहर ढाने लगा है। गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि से तटवर्ती क्षेत्र में जलप्रलय का नजारा दिख रहा है। गांव,कॉलोनियों के मकान पानी में डूब टापू बन गये हैं। गंगा के तेज पलट प्रवाह से वरूणा नदी भी विध्वंसकारी रूप अपना तटवर्ती और निचले क्षेत्र में कहर बरपा रही है। सड़क और गलियों में आवागमन का साधन नौका बन गई है। लोग दुश्वारियों से परेशान घर छोड़कर बाढ़ राहत शिविर या फिर ऊंचे स्थानों पर किराये का कमरा लेकर किसी तरह दिन गुजार रहे हैं। राहत शिविरों में भी व्यवस्था ढंग का नहीं होने से लोग बेहाल हैं।

मंगलवार को सुबह 10 बजे तक गंगा का जलस्तर 71.77 मीटर दर्ज किया गया। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा में बढ़ाव जारी है। लगभग एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा बढ़ रही है। रविवार देर रात लगभग एक बजे गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 71.26 मीटर को पार कर गया था। सोमवार सुबह आठ बजे तक गंगा का जलस्तर 71.38 मीटर रहा। शाम को गंगा में बढ़ाव तेज हो गया और रफ्तार दो सेंटीमीटर प्रति घंटा हो गया। शाम सात बजे तक गंगा का जलस्तर 71.55 मीटर पहुंच गया। बताया जा रहा है कि चार अगस्त को कोटा बैराज धौलपुर से 22 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद चंबल नदी के जलस्तर में नौ मीटर तक वृद्धि हो गई है। इससे जुड़ी यमुना में छह मीटर बढ़ाव दर्ज किया गया है।

गंगा में बढ़ाव से सामनेघाट मारूति नगर,शिवाजीनगर जलमग्न हो गया है। एनडीआरएफ की टीम क्षेत्रीय लोगों की मदद में जुटी हुई है। रामनगर बलुआघाट स्थित मछली मंडी गंगा के आगोश में समा गई है। पीएसी जल पुलिस का बूथ भी पानी में डूब टापू बन गया है। अस्सी तट को अपने आगोया में लेकर गंगा की लहरे सड़क पर आ गई है।अस्सी से नगवा मार्ग भी जलमग्न हो गया है। इस इलाके में भी एनडीआरएफ की 11वीं वाहिनी राहत और बचाव कार्य में लगी हुई है। लोगों का आरोप है कि राहत शिविरों में कोई सुविधा नहीं मिल रही हैं। उधर,गंगा में लगातार बढ़ाव से मणिकर्णिका घाट पर शवदाह करने जाने वाले शव यात्रियों को मुसीबत उठानी पड़ रही है। घाट की गलियों में सीने से अधिक पानी भर जाने के कारण नावों के जरिए शवों को घाट तक पहुंचाना पड़ रहा है। घाट का निचला इलाका जलमग्न होने के कारण छतों पर ही शवदाह हो रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर भी गलियों और ऊंचे स्थानों पर शवदाह हो रहा है। गलियों में स्थित घरों में बाढ़ का पानी भरने के कारण इन इलाकों की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। कई लोग ऐसे भी हैं जो अपने घरों की छतों पर ही ठिकाना बना कर रह रहे हैं।

एनडीआरएफ की टीम वृद्ध, बच्चों व पालतू जानवरों को भी बाढ़ ग्रस्त इलाके से निकालने का कार्य कर रही है। एनडीआरएफ के अधिकारी सहित टीमें लोगों को राहत पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। जो भी लोग घर की छतों पर शरण लिए हुए हैं, उन्हें राहत सामग्री भी पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। एनडीआरएफ के जवानों के अनुसार बाढ़ में अभी किसी भी प्रकार के कैजुअल्टी की कोई सूचना नहीं है।

दोनों नदियों में आई बाढ़ की वजह से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले 10 हजार से अधिक लोग मुश्किलों में घिर गए हैं। वरुणा किनारे के दर्जन भर मुहल्लों के लोग अपना घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए हैं।

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