-नमाजियों ने घर परिवार के साथ मुल्क की तरक्की, खुशहाली और अमन भाईचारे के लिए भी दुआ की
वाराणसी (हि.स.)। मुकद्दस रमजान के आखिरी जुमा (अलविदा) की नमाज पूरी अकीदत के साथ शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा के बीच जिले के शहरी और ग्रामीण अंचल के छोटी —बड़ी मस्जिदों और इबादतगाहों में अता की गई। मस्जिद ज्ञानवापी,मस्जिद दायम खां पुलिस लाइन, मस्जिद लंगड़े हाफिज-नई सड़क, मस्जिद खरबूजा शहीद, जामा मस्जिद नदेसर, मस्जिद लाट सरैंया अलविदा जुमे की नमाज पढ़ने के बाद नमाजियों ने घर परिवार के साथ मुल्क की तरक्की, खुशहाली और अमन भाईचारे के लिए भी दुआ की।
प्रदेश शासन के गाइड लाइन और निर्देश के क्रम में मस्जिद के बाहर नमाज अता न करने की अपील पहले से ही की गई थी। इस क्रम में जिले के सभी मस्जिदों के अंदर ही नमाज अता की गई। शहर में खुशनुमा माहौल के बीच नमाज में पढ़े जाने वाले खुतबों में माहे रमजान को अलविदा किया गया। मस्जिदों में तकरीर के दौरान मौलाना ने कहा कि रमजान एक बेहतरीन माह है जिसमें खुदा की रहमत बढ़ जाती है। दुआएं कुबूल होती हैं। शब-ए-कद्र में जागकर इबादत करें। इसी क्रम में नई सड़क, दालमंडी, बेनियाबाग, मदनपुरा, शिवाला, रेवड़ी तालाब, बजरडीहा, अर्दली बाजार, नदेसर, बड़ी बाजार, कोयला बाजार, दोषिपुरा, सरैया, लॉट, पुराना पुल, मुकिमगंज, चौहट्टा, प्रहलाद घाट, पीलीकोठी, गोलगड्डा, रामनगर, आदि इलाकों में तथा दारानगर शिया जामा मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की गयी।
रहमतों और बरकतों के पवित्र महीने रमजान के आखिरी जुमे पर महिलाओं ने घरों में नमाज अदा की। इसके पहले दोपहर में लोग पाक-साफ कपड़े पहन मस्जिदों में अलविदा की नमाज पढ़ने के लिए पहुंचने लगे। नमाज को लेकर बच्चों से लेकर युवाओं में भी उत्साह रहा। तकरीर के दौरान माहे रमजान में रोजे, नियमित नमाज, जकात- खैरात इम्दाद के साथ यथा समय फितरा अदा करने का आह्वान किया गया। इसके बाद खुतबे में ‘माहे रमजान अलविदा’ पढ़ा गया।
श्रीधर
