-भद्रा के फेर में दो दिन बना रक्षाबंधन, पूर्णिमा तिथि पर गुरुवार देर शाम को भी पर्व मना
वाराणसी (हि.स.)। बहन-भाई के पवित्र रिश्ते का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार को उल्लासपूर्ण माहौल में मनाया जा रहा है। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में बहनों ने थाली में राखी, रोरी, अक्षत दीप आदि सजाकर भाई के माथें पर तिलक किया। इसके बाद कलाई में प्यार और आशीर्वाद की राखी बांधकर आरती उतारीं।
इस दौरान अपने भाईयों के श्री समृद्धि व दीर्घायु होने की कामना कीं। रक्षासूत्र बांधने के बदले भाईयों ने भी अपनी बहनों के रक्षा का संकल्प लिया। सुबह ही भाई के घर पर राखी बांधने के लिए पहुंची विवाहित बहनों पर भाईयों ने भी दिल खोलकर उपहार लुटाया। साड़ी, जेवर आदि बतौर उपहार पाकर बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पर्व पर छोटे-छोटे बच्चों का प्रेम भी देखते बन रहा था। सुबह से ही नए वस्त्र पहन कर बहनें पति के साथ वाहनों पर सवार होकर बाजार में पहुंची। मिठाईयों की दुकानों से मनपसंद मिठाईयां खरीदी और राखी की सजी दुकानों से राखी लेकर अपने मायके के लिए रवाना हुईं।
रक्षाबंधन पर्व इस बार भद्रा के चलते दो दिन मनाया जा रहा है। श्रावण पूर्णिमा तिथि पर गुरुवार को दिनभर भद्रा रहने के चलते बहनों ने रात आठ बजे के बाद भाइयों के कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। इस दौरान घरों में बहनों ने भाई की कलाई पे प्यार बांधा है, प्यार के दो तार से संसार बांधा है। भईया मेरे राखी के बंधन को निभाना, भैया मेरे छोटी बहन को न भुलाना जैसे सदाबहार फिल्मी गानों की गूंज फिजाओं में रही।
इस पर्व पर राखी के साथ-साथ मिठाई की भी काफी बिक्री हुई। दिनभर सड़कों पर लोगों की आवाजाही लगी रही। अन्य दिनों की अपेक्षा स्थानीय बस स्टैंड व ऑटो स्टैंड से खुलने वाली बसों और ऑटो में भीड़ अधिक थी। जिसमें अधिक संख्या महिलाओं की थी। दूर-दराज से भी कई विवाहित बहनें अपने भाईयों के घर पहुंच कर राखी बांधा। तो वहीं कई भाई खुद राखी बंधवाने बहनों के घर पहुंचे। भाईयों के माथे पर टीका लगाकर उन्हें राखी बांधती बहनों की खुशी देखते ही बनती थी। इस मौके पर घरों में विशेष पकवान बनाए गए।
श्रीधर
