– वायुसेना की 50 साल सेवा करने के बाद 2013 में मिग-21 किये गए थे रिटायर
– मिग वेरिएंट की विदाई के लिए मिली थी एलसीए तेजस परियोजना को मंजूरी
– पाकिस्तान से दो जंगों के दौरान मिग-21 ने दिखाई हैं अपनी युद्धक क्षमताएं
नई दिल्ली (हि.स.)। पिछले छह दशकों में वायुसेना के दुर्घटनाग्रस्त होने वाले विमानों में सबसे अधिक संख्या रूसी लड़ाकू मिग वेरिएंट की रही है। ’उड़ता ताबूत’ कहे जाने वाले यह 800 से ज्यादा विमान खुद नष्ट होने के साथ ही 400 से अधिक पायलटों की जान ले चुके हैं। यही वजह है कि इस वक्त वायुसेना करीब 400 पायलटों की कमी से जूझ रही है। भारत के हवाई बेड़े से मिग की विदाई करने के लिए ही अगस्त, 1983 में एलसीए तेजस परियोजना को मंजूरी दी गई थी लेकिन अभी इस योजना के परवान चढ़ने में कई साल बाकी है। तीन दिन पहले पंजाब में मिग बाइसन की दुर्घटना में वायुसेना ने एक और पायलट खो दिया है।
इसी तरह 1991-2000 की अवधि के दौरान 283 विमान दुर्घटनाएं और वायुसेना में 4,418 घटनाएं हुई थीं जिसमें 221 विमान पूरी तरह से नष्ट हो गए और आईएएफ के 100 पायलटों की जान चली गई। अप्रैल, 1991 से मार्च, 1997 तक छह साल की अवधि में प्रति 10 हजार उड़ान घंटों में दुर्घटनाओं की समग्र दर में गिरावट दर्ज की गई थी जबकि 1997 से 2000 के बीच 84 दुर्घटनाएं होने से दर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि के दौरान भारतीय वायुसेना ने अकेले 38 मिग-21 विमान खो दिए थे। मिग वेरिएंट में दुर्घटनाओं की उच्च दर के कारणों का हवाला देते हुए मंत्रालय ने तर्क दिया था कि आईएएफ का लड़ाकू बेड़ा अत्यधिक मिग आधारित है, इसलिए इनकी लड़ाकू उड़ान में दुर्घटना का जोखिम ज्यादा है। आखिरकार 50 वर्षों तक वायुसेना की सेवा में रहने के बाद 11 दिसम्बर, 2013 को इसे रिटायर कर दिया गया।इसके बाद रूसी कंपनी ने भारतीय वायुसेना के पास बचे 54 मिग-21 विमानों की कई कमियों को दूर करके इसे मिग बाइसन के रूप में अपग्रेड किया। इस अपग्रेडेड ‘मिग-21 बाइसन’ में बबल कैनोपी और रैपराउंड विंडस्क्रीन, पहले से ज्यादा अधिक सक्षम रडार, दूर तक देखने की क्षमता, बियॉन्ड विजुअल रेंज, मिसाइल से फायर करने की क्षमता है। इनके अलावा कई अन्य संशोधनों ने हवाई जहाज की क्षमता में चार गुना वृद्धि की और इसे शुरुआती एफ-16 वेरिएंट के स्तर तक लाया गया। इसके बावजूद मिग बाइसन की दुर्घटनाओं में कमी नहीं आ रही है। एमकेआई की खरीद के लिए आगे बढ़ रही। वायुसेना को इस साल फरवरी में हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के साथ 46,898 करोड़ रुपये के सौदे के तहत 2024-2028 तक 83 नए तेजस जेट मिलने की उम्मीद है। पहले ऑर्डर किए गए 40 तेजस जेट विमानों में से आधे से अधिक अब तक भारतीय वायुसेना को मिल चुके हैं।
