Saturday, February 14, 2026
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 लोकतांत्रिक देश था आजाद तिब्बत, चीन मिटा रहा पहचान-लामा तेंजिन

कुशीनगर(हि.स.)। पावानगर महावीर इंटर काॅलेज में मंगलवार को आयोजित तिब्बत जागरूकता कार्यक्रम में वक्ताओं ने तिब्बत को अलग राष्ट्र बनाने व भारत-तिब्बत संबंधों को मजबूत करने पर पर बल दिया। तिब्बती संस्कृति व परंपरा को अक्षुण्ण रखने के लिए भारत के योगदान की सराहना की तथा विश्व मंच पर तिब्बत का पक्ष और अधिक मजबूती से रखने पर जोर दिया।

भारत तिब्बत समन्वय केंद्र व भारत तिब्बत संवाद मंच के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में भारत तिब्बत केंद्र के समन्वयक थुपटेन रिंजिंग ने कहा कि भारत तिब्बत के संबंध ऐतिहासिक हैं। पड़ोसी के साथ मधुर संबंध भारत की नीति है। आजाद तिब्बत लोकतांत्रिक था। तिब्बती लोग चीन के दमन का शिकार हैं। उप समन्वयक तेंजिन जोर्डन ने कहा कि तिब्बत की संस्कृति व पहचान को मिटाने की कोशिश चीन द्वारा की जा रही है। इसके लिए लिए बल का प्रयोग करने से भी चीनी शासक नहीं चूकते हैं। तिब्बत कोर ग्रुप के सुरेंद्र कुमार ने कहा कि जब तक तिब्बत संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत का पड़ोसी था, तब तक सब कुछ ठीक था। चीनी अधिकार में जाते ही भारत व तिब्बत दोनों के लिए समस्या हो गई। भारतीयों को तिब्बत की आजादी का समर्थन हर हाल में करना चाहिए। प्रधानाचार्य डॉ. अक्षयबर पाण्डेय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार जताया। इस दौरान विश्राम यादव, चंद्रशेखर उपाध्याय, नंदा पाण्डेय, बसंत सिंह, रामकेवल प्रसाद, दिव्य प्रकाश तिवारी, संजय मिश्रा आदि उपस्थित रहे।

गोपाल/सियाराम

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